इंडोनेशिया के साथ भारत का ब्रह्मोस दांव, चीन के समुद्री चक्रव्यूह को मिलेगी कड़ी चुनौती
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की 6 दिवसीय विदेश यात्रा शुरू हो चुकी है। इस दौरे की शुरुआत इंडोनेशिया से हुई है, जो भारत के एक्ट ईस्ट पॉलिसी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को रोकने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

चीन को काउंटर करने का महासागर विजन भारत ने चीन की कर्ज-जाल (Debt-trap) कूटनीति के जवाब में अपना MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन पेश किया है। जहां चीन बंदरगाहों पर कब्जा कर अपनी सैन्य पकड़ मजबूत कर रहा है, वहीं भारत विकास, साझा सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी के जरिए इन देशों का विश्वसनीय साथी बनकर उभर रहा है।

इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल देगा भारत इस यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु इंडोनेशिया के साथ होने वाली रक्षा डील है। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइलें सौंपने की तैयारी में है। इसका उपयोग इंडोनेशिया अपने नटुना सागर की सुरक्षा और संप्रभुता बनाए रखने के लिए करेगा। यह सीधा संदेश है कि दक्षिण चीन सागर के आसपास चीन की दादागिरी अब नहीं चलेगी।

ग्वादर से हंबनटोटा तक चीन की घेराबंदी चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हंबनटोटा, म्यांमार के क्याकप्यू और बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाहों में भारी निवेश कर भारत को घेरने की कोशिश की है। इसके अलावा, जिबूती में उसका सैन्य अड्डा हिंद महासागर में भारत की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया है। इन समुद्री मार्गों से दुनिया का 80% तेल व्यापार गुजरता है, जिस पर चीन का एकाधिकार भारत के लिए गंभीर खतरा है।

सांस्कृतिक और रणनीतिक कूटनीति का मेल इंडोनेशिया यात्रा के दौरान पीएम मोदी वहां के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का दौरा करेंगे। यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के बीच दो हजार साल पुराने सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। इंडोनेशिया का राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ हो या उनकी भाषा में समाहित संस्कृत के शब्द, ये इस बात के प्रमाण हैं कि दोनों देशों की जड़ें एक-दूसरे से गहरी जुड़ी हैं।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ नई साझेदारी इंडोनेशिया के बाद पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के साथ क्रिटिकल मिनरल और समुद्री सुरक्षा पर बड़े समझौते होंगे। वहीं, लगभग 40 वर्षों में पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा के तहत न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड डील होने की उम्मीद है। ये सभी समझौते चीन के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए भारत के ‘पंच’ (पांचों देशों के साथ रणनीतिक तालमेल) के रूप में देखे जा रहे हैं, जो आने वाले समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समीकरण पूरी तरह बदल देंगे।

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