ब्रह्मोस और आकाश की धमक: भारत के रक्षा कौशल पर फिदा हुए ये देश, PM मोदी के दौरे से पहले पूर्व राजदूत का बड़ा खुलासा
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया यात्रा से पहले कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत ने इस दौरे को वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख और प्रभाव के तौर पर देखा है।

दुनिया में बढ़ा भारतीय हथियारों का क्रेज पूर्व राजदूत त्रिगुनायत ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ समय में भारत की रक्षा प्रणालियों, विशेष रूप से ब्रह्मोस मिसाइल और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम ने वैश्विक स्तर पर अपनी कार्यक्षमता साबित की है। उन्होंने कहा कि इन हथियारों के शानदार प्रदर्शन के बाद से ही इंडोनेशिया सहित कई अन्य देशों की दिलचस्पी भारतीय रक्षा उपकरणों में तेजी से बढ़ी है।

एक्ट ईस्ट नीति का केंद्र बने रिश्ते त्रिगुनायत ने बताया कि भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है। भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक जैसी सोच है। उन्होंने कहा, दुनिया के प्रमुख व्यापारिक मार्गों, जैसे मलक्का स्ट्रेट और स्वेज कैनाल की सुरक्षा के लिए भारत का अपने साझेदारों के साथ तालमेल बिठाना बेहद जरूरी हो गया है।

आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर तालमेल भारत और इंडोनेशिया के बीच केवल रक्षा ही नहीं, बल्कि कृषि और निवेश के क्षेत्र में भी गहरा सहयोग है। वर्तमान में 130 से अधिक भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया में सक्रिय हैं। दोनों देश अब मेक इन इंडिया और मेक इन इंडोनेशिया के तालमेल से एक ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान करे।

न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ कूटनीतिक जुड़ाव पीएम मोदी के अन्य पड़ावों पर चर्चा करते हुए त्रिगुनायत ने कहा कि न्यूजीलैंड के साथ हाल ही में हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के व्यावसायिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के साथ ऊर्जा, शिक्षा और निवेश के क्षेत्र में भारत के संबंध पिछले एक दशक में ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचे हैं।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका विशेषज्ञ का मानना है कि ब्रिक्स (BRICS) और क्वाड (QUAD) जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों की अध्यक्षता भारत के पास होने से इन देशों के साथ होने वाली बातचीत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत को एक सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में स्थापित करेगा।

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