रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर यूक्रेन का बड़ा प्रहार, साइबेरिया तक पहुंची कीव के ड्रोन की मार
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। कीव की सेना ने अब तक के सबसे साहसी हमलों में से एक को अंजाम देते हुए रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी, ओम्स्क (Omsk) को निशाना बनाया है। यह हमला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रिफाइनरी यूक्रेन की सीमा से लगभग 2700 किलोमीटर दूर साइबेरिया के भीतरी इलाके में स्थित है।

2700 किमी दूर भीषण धमाका

यूक्रेनी जनरल स्टाफ के अनुसार, रात भर चले इस ऑपरेशन में लंबी दूरी के ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया। ओम्स्क रिफाइनरी रूस की दिग्गज कंपनी गजप्रोमनेफ्ट के स्वामित्व में है, जो रोजाना करीब 23 मिलियन मीट्रिक टन तेल प्रोसेस करती है। हमले के बाद रिफाइनरी परिसर में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए आपातकालीन सेवाओं को युद्धस्तर पर लगाया गया है।

ओम्स्क के गवर्नर विटाली खोत्सेंको ने स्वीकार किया है कि औद्योगिक केंद्र के पास यूक्रेनी ड्रोन पहुंचे, जिससे रूसी प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

सिर्फ ओम्स्क ही नहीं, कई मोर्चों पर हमला

यूक्रेन ने केवल ओम्स्क को ही नहीं, बल्कि एक साथ रूस के कई प्रमुख तेल ठिकानों को निशाना बनाया है। बाल्टिक सागर के रास्ते तेल निर्यात करने वाले उस्त-लुगा (Ust-Luga) और विसोत्स्क (Vysotsk) बंदरगाहों पर भी यूक्रेनी ड्रोन कहर बनकर टूटे। इसके अलावा कलुगा और यारोस्लाव जैसे शहरों में भी रात भर विस्फोटों की गूंज सुनाई दी।

केर्च बंदरगाह पर हुए एक हमले में नागरिक हताहत होने की भी खबर है, जहां एक महिला की मौत की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों द्वारा की गई है।

रूस की ईंधन अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट

यूक्रेन की रणनीति साफ है—रूस की तेल लाइफलाइन को काटकर उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करना। इन लगातार हमलों के कारण रूस के 11 टाइम जोन वाले विशाल क्षेत्र में ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है।

रूस के लिए यह हमला चिंता का विषय है क्योंकि इतनी लंबी दूरी तक यूक्रेनी ड्रोन्स का पहुंचना यह साबित करता है कि रूसी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) में बड़ी खामियां हैं।

क्या बदलेगा युद्ध का रुख?

इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें रिफाइनरी से उठती आग की लपटें साफ देखी जा सकती हैं। हालांकि रूस ने अभी तक हुए नुकसान का पूरा ब्योरा साझा नहीं किया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यूक्रेन अपनी तकनीक और पहुंच को लगातार उन्नत कर रहा है।

पिछले साढ़े चार वर्षों से जारी यह संघर्ष अब रूस की आर्थिक रीढ़ और पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधे तौर पर चुनौती दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि मॉस्को इस डीप-स्ट्राइक का जवाब किस प्रकार देता है।

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