दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज (पूर्व नाम पंजाब 95 ) रिलीज के 48 घंटों के भीतर ही ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से भारत में हटा दी गई है। इस अचानक आई रोक ने फिल्म को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सेंसर बोर्ड की कैंची और कानूनी दांव-पेच के बीच फंसी यह फिल्म अब सोशल मीडिया पर सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या है फिल्म का विवाद? फिल्म का नाम पंजाब 95 से बदलकर सतलुज रखा गया था। फिल्म में 123 कट लगाने के कड़े निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्माता ने बिना किसी बड़े बदलाव के इसे अनकट रिलीज करने का साहसी फैसला लिया। हालांकि, रिलीज के महज दो दिनों के भीतर इसे हटा दिया गया, जिससे दर्शकों और प्रशंसकों में भारी रोष है।
हरभजन सिंह का भावुक रिव्यू पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने फिल्म देखने के बाद एक शक्तिशाली संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, जसवंत सिंह खालरा की कहानी देखने के बाद मन में एक सवाल उठता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो उससे ज्यादा दर्दनाक क्या हो सकता है? सरकारी ताकत का गलत इस्तेमाल कैसे पीढ़ियों तक जख्म देता है, यह फिल्म वही दिखाती है। सच को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।
डायरेक्टर ओनिर ने की फिल्म की तारीफ फिल्म निर्देशक ओनिर ने सतलुज को एक चौंकाने वाली और ईमानदार कृति बताया है। उन्होंने कहा, यह फिल्म इसलिए परेशान नहीं करती कि पंजाब ने क्या देखा, बल्कि इसलिए करती है क्योंकि यह आज के दौर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर सवाल उठाती है। उन्होंने फिल्म में दिलजीत दोसांझ की एक्टिंग की जमकर सराहना की और कहा कि उनकी आंखें बिना कुछ कहे बहुत कुछ बयां कर देती हैं।
बॉलीवुड और फैंस का समर्थन फिल्म के अनकट वर्जन को रिलीज करने के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म की तारीफ हो रही है, लेकिन भारत से इसे हटाए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। फिल्म में दिलजीत के साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या जैसे कलाकारों के काम को भी काफी सराहा जा रहा है।
यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने लापता लोगों के मामलों को उजागर किया था। फिलहाल, फिल्म के हट जाने के बाद सतलुज गूगल पर टॉप ट्रेंड कर रही है और हर कोई इसके अनकट वर्जन की सच्चाई जानने के लिए उत्सुक है।
Jallianwala Bagh stands as one of history’s greatest massacres. It was carried out by a colonial regime. But the question that haunts me after watching Jaswant Singh Khalra is different:
— Harbhajan Turbanator (@harbhajan_singh) July 5, 2026
What is more painful than oppression by an outsider? When those entrusted to protect their… pic.twitter.com/zb71vPhKss
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