पूर्णिया: कृषि क्षेत्र में बिचौलियों और कालाबाजारी पर नकेल कसने के लिए पूर्णिया जिला प्रशासन और जीविका ने एक बड़ा कदम उठाया है। कृषि उद्यमी कार्यक्रम के तहत जिले के 5 प्रखंडों में 10 नए कृषि उद्यमियों को बीज और खाद बेचने का आधिकारिक लाइसेंस दिया गया है।
किसानों को होगा सीधा लाभ इस पहल से धमदाहा, पूर्णिया पूर्व, के. नगर, कसबा और डगरुआ प्रखंड के 3,000 से अधिक सीमांत और लघु किसानों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें खाद और बीज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि उनके स्थानीय क्षेत्र में ही उचित मूल्य पर प्रमाणित कृषि इनपुट उपलब्ध होंगे।
कालाबाजारी और सिंडिकेट पर चोट अक्सर बुवाई के सीजन में खाद की किल्लत और ऊंचे दामों पर बिक्री की समस्या किसानों की कमर तोड़ देती थी। जीविका और सिंजेंटा फाउंडेशन के इस नेटवर्क से बिचौलियों का सिंडिकेट ध्वस्त होगा। किसानों को अब सरकारी दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज और खाद मिलेंगे, जिससे बुवाई के समय होने वाली धांधली पर रोक लगेगी।
अधिकारियों ने सौंपी जिम्मेदारी जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) हरिद्वार चौरसिया और सिंजेंटा फाउंडेशन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रंजीत कुमार ने संयुक्त रूप से उद्यमियों को लाइसेंस प्रदान किए। इस मौके पर कृषि विशेषज्ञ और जीविका के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर बताया।
140 उद्यमियों को मिल चुका है लाइसेंस जिले में यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पूरे जिले में 245 सक्रिय कृषि उद्यमी हैं, जिनमें से 140 को अब तक लाइसेंस मिल चुका है। जीविका प्रबंधन का लक्ष्य है कि शेष 105 उद्यमियों को भी जल्द लाइसेंस मिले, ताकि पूरे जिले में एक पारदर्शी सप्लाई चेन तैयार हो सके।
नकली बीजों से मिलेगी मुक्ति स्थानीय किसानों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। उनका मानना है कि नकली बीजों की समस्या से फसल बर्बादी का जो डर बना रहता था, वह अब खत्म हो जाएगा। जीविका द्वारा प्रमाणित आउटलेट्स पर मिलने वाली शुद्धता की गारंटी से न केवल फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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— Prabhat Khabar (@prabhatkhabar) June 28, 2026
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