प्याज की कीमतों में बड़ा बदलाव: सरकार ने 13% बढ़ाए खरीद के दाम, किसानों के लिए राहत पर क्या होगा असर?
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अगर आपकी रसोई का बजट प्याज की कीमतों पर निर्भर करता है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने और बफर स्टॉक को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब बफर स्टॉक के लिए किसानों से 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदेगी।

खरीद मूल्य में 13% का इजाफा पहले सरकार किसानों से 1,875 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर प्याज खरीद रही थी। अब इसमें लगभग 13% की बढ़ोतरी कर दी गई है। यह नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। यह इस सीजन में पांचवीं बार है जब सरकार ने खरीद मूल्य में बढ़ोतरी की है, ताकि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? सरकार ने बफर स्टॉक के लिए खरीद के दामों में चरणबद्ध तरीके से वृद्धि की है। मई में यह कीमत 12.70 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 21.25 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से बाजार में प्याज की उपलब्धता बनी रहेगी और संकट के समय आम जनता को राहत मिलेगी।

बाजार में प्याज की स्थिति सरकारी अनुमान के मुताबिक, साल 2025-26 में देश में करीब 307.37 लाख टन प्याज उत्पादन की उम्मीद है, जो पिछले साल के स्तर के बराबर है। फिलहाल मंडियों में रोजाना 50 हजार टन से अधिक प्याज की आवक हो रही है। मंडियों में औसत भाव 18 रुपये प्रति किलो है, जबकि खुदरा बाजार में उपभोक्ता इसे करीब 31 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रहे हैं।

मानसून और निर्यात का असर मानसून में देरी और कुछ व्यापारियों द्वारा अच्छी क्वालिटी के प्याज को स्टॉक करने के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। दूसरी ओर, भारत से प्याज का निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। जून में 1.50 लाख टन निर्यात के बावजूद, खाड़ी देशों और श्रीलंका में भारतीय प्याज को पाकिस्तान और चीन के सस्ते प्याज से कड़ी टक्कर मिल रही है।

आम जनता पर क्या होगा असर? सरकार का मुख्य उद्देश्य बफर स्टॉक को भरना है ताकि त्योहारों के सीजन में या सप्लाई कम होने पर कीमतों को काबू में रखा जा सके। फिलहाल, सरकार के इस फैसले से किसानों की आय में सुधार की उम्मीद है, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना कम ही नजर आ रही है।

लेखिका: जेबा परवीन

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