यूरेनियम सप्लाई पर बड़ा दांव: क्या पीएम मोदी के दौरे से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई उड़ान?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की अहम यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरे पर भारत की नजरें विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम सप्लाई की एक बड़ी कमर्शियल डील पर टिकी हैं। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो यह भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

अटकी हुई डील पर उम्मीदों का दौर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2014 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। हालांकि, तकनीकी और रणनीतिक कारणों से वर्षों से यूरेनियम सप्लाई का मामला ठंडे बस्ते में रहा है। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (इंडो-पैसिफिक) विश्वेश नेगी के अनुसार, दोनों देशों के बीच काफी अहम बातचीत हुई है और उम्मीद है कि पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीज के साथ मुलाकात से इस पर कोई तार्किक नतीजा निकल सकता है।

विकसित भारत के सपने के लिए परमाणु ऊर्जा अनिवार्य भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनने का है। इस लक्ष्य को पाने के लिए एआई (AI) और डेटा सेंटर्स के क्षेत्र में क्रांति लानी होगी, जिसके लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता है। कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए परमाणु ऊर्जा ही एकमात्र टिकाऊ विकल्प है। सरकार ने अपनी न्यूक्लियर क्षमता को 63,000 मेगावाट तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

क्यों ऑस्ट्रेलिया पर टिकी हैं निगाहें? ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार मौजूद है। भारत को वर्तमान में 1,500 से 2,000 टन यूरेनियम की वार्षिक जरूरत है, जो 2047 तक बढ़कर 5,400 टन होने का अनुमान है। भारत अभी अपनी मांग का 70-75 फीसदी हिस्सा कनाडा, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और रूस से आयात करता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से होने वाली सप्लाई भारत को न केवल ऊर्जा सुरक्षा देगी, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में विविधता भी लाएगी।

निवेश और रणनीतिक भंडार की चुनौती 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को करीब 85 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है। भारत सरकार अब इस बात पर जोर दे रही है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय समझौते को पूरी तरह लागू किया जाए ताकि यूरेनियम का रणनीतिक भंडार बनाया जा सके। घरेलू अयस्क की कम गुणवत्ता और उच्च निष्कर्षण लागत के कारण, ऑस्ट्रेलिया का यूरेनियम भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बेहद अनमोल खजाना माना जा रहा है।

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