भरत तिवारी एनकाउंटर मामला सम्राट सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा के पूर्व सांसद आरके सिंह ने इस मामले में फिर मोर्चा खोला है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक जांच पुलिस के दायरे से बाहर नहीं होगी, तब तक न्याय की उम्मीद बेमानी है।
हथियार डालने के बाद क्यों चली गोली? आरके सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि 17 जून की घटना हजारों लोगों ने फेसबुक लाइव पर देखी थी। उनके अनुसार, भरत तिवारी ने पुलिस की अपील पर अपनी पिस्तौल फेंक दी थी और आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी ले लिया था। सवाल यह है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें गोली क्यों मारी गई?
पुलिस की जांच पर सवाल सरकार ने रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच की घोषणा की है, लेकिन आरके सिंह इसे काफी नहीं मानते। उन्होंने कहा कि आपराधिक मामलों में असली काम इन्वेस्टिगेशन (जांच) का होता है। यदि जांच वही पुलिस करेगी जिस पर खुद आरोप हैं, तो निष्पक्षता संभव नहीं है। इसलिए, निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई का होना जरूरी है।
जातीय राजनीति पर तीखा प्रहार आरके सिंह ने इस मामले को जातीय रंग देने की कोशिशों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुछ नेता इस मुद्दे को किसी विशेष जाति से जोड़कर राजनीति कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने तर्क दिया कि मुद्दा यह नहीं है कि मृतक किस जाति का था, बल्कि यह है कि पुलिस हिरासत में मौत कैसे हुई। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ऐसे मामलों में जाति से ऊपर उठकर सच्चाई का साथ दें।
भरत तिवारी का सामाजिक पक्ष आरके सिंह ने भरत तिवारी के बैकग्राउंड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भरत लंबे समय से समाजसेवा में सक्रिय थे और बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि हाल के दिनों में उनके व्यवहार में कुछ असामान्यता दिखी थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पुलिस कानून हाथ में ले ले।
फिलहाल, आरके सिंह की इस मांग ने मामले को और गर्मा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सम्राट सरकार दबाव में सीबीआई जांच के लिए राजी होती है या विवाद और लंबा खिंचेगा।
भरत तिवारी की हत्या और जात पात। pic.twitter.com/uAN9V0L0tQ
— R. K. Singh (@RajKSinghIndia) July 3, 2026
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