हम अक्सर दफ्तर के तनाव, ट्रैफिक या नींद की कमी को जिंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत मान लेते हैं। लेकिन दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर एक ऐसा शख्स है, जिसकी कहानी सुनने के बाद आप अपनी शिकायतों को भूल जाएंगे। यह कहानी है एक ऐसे पिता की, जो अपने बीमार बच्चे के लिए अपनी रातों की नींद तक कुर्बान कर चुका है।
इस कहानी के सूत्रधार शिखर नाम के एक यूजर हैं। एक दिन ऑफिस के लिए देर हो रही थी, तो उन्होंने रैपिडो बाइक टैक्सी बुक की। राइडर जल्दी पहुंच गया, लेकिन शिखर के निकलने में 5 मिनट की देरी हुई। राइडर ने कई बार फोन कर जल्दबाजी दिखाई। बाइक पर बैठते ही शिखर ने चिढ़कर पूछा, इतनी जल्दी किस बात की है? राइडर ने मुस्कुराते हुए जो जवाब दिया, उसने शिखर को सन्न कर दिया: भैया, मुझे भी ऑफिस के लिए देर हो रही है।
बातचीत में पता चला कि यह शख्स दिन में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है, जहां उसे 20,000 रुपये मिलते हैं। परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। सबसे बड़ी चुनौती उसका दिव्यांग बेटा है, जिसके इलाज में ही हर महीने 10,000 रुपये खर्च हो जाते हैं। आधी सैलरी इलाज में जाने के बाद घर का खर्च चलाना नामुमकिन था, इसलिए उसने रैपिडो चलाना शुरू किया।
इस शख्स की दिनचर्या किसी चमत्कार से कम नहीं है। वह सुबह 6 बजे घर से बाइक लेकर निकलता है और 9 बजे तक सवारियां ढोता है। फिर 10 बजे ऑफिस पहुंचता है। शाम 6:30 बजे दफ्तर से छुट्टी के बाद वह तुरंत फिर से बाइक उठा लेता है और रात 11 बजे तक काम करता है। पिछले आठ महीनों से वह हर दिन बमुश्किल 5 घंटे ही सो पा रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसके चेहरे पर न तो कोई शिकन थी और न ही हालात को लेकर कोई शिकायत। उसने बस इतना कहा, अब भगवान की यही मर्जी है। उसकी सादगी और मेहनत ने शिखर को गहरे आत्मचिंतन में डाल दिया।
शिखर ने जब यह अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया, तो यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई। लोग इसे असली सुपरहीरो की कहानी बता रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि पिता कभी हार नहीं मानता, चाहे हालात कितने भी विपरीत क्यों न हों।
यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारी रोजमर्रा की परेशानियां उन लोगों के संघर्ष के सामने बहुत छोटी हैं, जो अपनों की मुस्कान के लिए खुद को हर दिन तिल-तिल कर जलाते हैं। शायद यही असली इंसानियत और जिम्मेदारी है।
life humbled me again today
— Shikhar (@shekhu04) July 1, 2026
i usually take the metro to work but this morning i was running late so i booked a rapido
the rider reached in 2 minutes
i was not able to find my room keys so it took me another 5 minutes to get downstairs. in those 5 minutes he called me 3 times… pic.twitter.com/aMFp0hOg5S
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