राम मंदिर ‘चंदा चोरी’ विवाद: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, पीएम मोदी को लिखा पत्र
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नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर के नाम पर एकत्र किए गए चंदे में वित्तीय अनियमितताओं और गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है।

करोड़ों भक्तों की आस्था से खिलवाड़ वेणुगोपाल ने अपने पत्र में दावा किया है कि राम मंदिर के चढ़ावे में हुई लूट ने करोड़ों भारतीय नागरिकों की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि यह न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि भगवान राम के नाम पर विश्वासघात भी है। उनका आरोप है कि इस पूरी साजिश में एक संगठित गिरोह काम कर रहा है।

साक्ष्य मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज डिलीट कांग्रेस नेता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नकदी गिनने वाले कर्मचारियों ने निगरानी तंत्र को दरकिनार कर कीमती आभूषणों और नकदी की चोरी की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अपराध के सबूत मिटाने के उद्देश्य से कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया है।

संस्थागत संरक्षण की ओर इशारा वेणुगोपाल के अनुसार, यह कथित लूट बिना संस्थागत संरक्षण के संभव नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के भीतर हर स्तर पर विफलता देखी गई है। ट्रस्ट के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी द्वारा दी गई चेतावनियों और भारतीय स्टेट बैंक द्वारा उठाए गए सवालों को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया, जो सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

एसआईटी जांच पर सवाल कांग्रेस महासचिव ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की जांच पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे महज दिखावा करार दिया है। वेणुगोपाल का तर्क है कि अब तक की कार्रवाई में केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है, जबकि असली मास्टरमाइंड और बड़े दोषी अभी भी कानून की पकड़ से दूर हैं।

पीएम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक सार्वजनिक ट्रस्ट है, जिसका गठन केंद्र सरकार ने किया है। ऐसे में इसकी जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि राम मंदिर की पवित्रता पर उठ रहे सवालों का अंत हो सके।

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