अंतरिक्ष में नई क्रांति: विक्रम-1 की उड़ान के लिए तैयार भारत का पहला निजी रॉकेट
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भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस अपनी पहली ऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट, जिसे मिशन आगमन नाम दिया गया है, के साथ इतिहास रचने को तैयार है। कंपनी का पहला ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 पूरी तरह असेंबल होकर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) के ऐतिहासिक फर्स्ट लॉन्च पैड पर तैनात हो चुका है।

इस ऐतिहासिक मिशन की लॉन्चिंग 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच किसी भी दिन हो सकती है।

450 किलोमीटर की ऊंचाई पर साधेगा निशाना

उड़ान भरने के बाद, यह रॉकेट पृथ्वी की कक्षा में 450 किलोमीटर ऊपर जाएगा। इस टेस्ट फ्लाइट का मुख्य उद्देश्य भारतीय और विदेशी ग्राहकों के सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में सुरक्षित स्थापित करने की क्षमता को परखना है।

कंपनी के अनुसार, यह केवल एक तकनीकी परीक्षण है। यदि यह सफल रहता है, तो स्काईरूट वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक सैटेलाइट लॉन्चिंग की सेवाएं शुरू कर देगी, जो भारत के स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

विक्रम-S से विक्रम-1 तक का सफर

साल 2022 में स्काईरूट ने विक्रम-S के जरिए अंतरिक्ष की सीमा को छूकर कामयाबी हासिल की थी। लेकिन विक्रम-1 उससे कहीं अधिक जटिल और सक्षम है। यह केवल सीमा छूने के लिए नहीं, बल्कि पृथ्वी की कक्षा में पेलोड स्थापित करने के लिए बनाया गया है। 1000 से अधिक कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से तैयार यह रॉकेट देश के कमर्शियल स्पेस मार्केट को नई गति देगा।

स्मार्ट तकनीक: खुद रास्ता बदलने में है माहिर

इस रॉकेट की सबसे बड़ी खूबी इसका एडवांस नेविगेशन (GNC) सिस्टम है। यह रॉकेट के सफर को बेहद सुरक्षित बनाता है। उड़ान के दौरान यदि तेज हवा या वायुमंडलीय दबाव के कारण रॉकेट अपने तय रास्ते से भटकता है, तो इसका स्मार्ट सॉफ्टवेयर बिना किसी बाहरी कमांड के खुद अपनी गलती सुधार लेगा और वापस सही दिशा में आ जाएगा।

रामानुजन कंप्यूटर: मिशन का असली मास्टरमाइंड

विक्रम-1 के भीतर सेंसर्स का एक जाल बिछाया गया है, जो बिल्कुल इंसानी नर्वस सिस्टम की तरह काम करता है। इस पूरे सिस्टम के दिमाग को महान गणितज्ञ के सम्मान में रामानुजन नाम दिया गया है।

यह मिशन कंप्यूटर उड़ान के पहले सेकंड से लेकर मंजिल तक रॉकेट के हर हिस्से को कमांड देगा। स्काईरूट के इंजीनियर्स इसी रामानुजन कंप्यूटर के जरिए रॉकेट के प्रोपल्शन सिस्टम और स्टेज सेपरेशन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर बारीक नजर रखेंगे।

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