Explainer: क्रिकेट में वाइड बॉल का पूरा गणित, जानिए ICC के सटीक नियम
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क्रिकेट का खेल जितना बल्ले और गेंद के बीच रोमांच के लिए जाना जाता है, उतना ही यह अपने जटिल नियमों के लिए भी मशहूर है। अक्सर फैंस के मन में सवाल आता है कि आखिर वाइड बॉल (Wide Ball) क्यों दी जाती है और अंपायर इसे किस आधार पर तय करते हैं? आइए, इन नियमों को आसान भाषा में समझते हैं।

क्या होती है वाइड बॉल?

आसान शब्दों में कहें तो वाइड बॉल वह गेंद है जिसे बल्लेबाज अपनी सामान्य बल्लेबाजी स्थिति (Normal Batting Position) में खड़े होकर नहीं खेल सकता। यदि गेंद बल्लेबाज की पहुंच से बहुत दूर है या उसके सिर के ऊपर से गुजर रही है, तो अंपायर उसे वाइड घोषित कर देता है। इसके लिए मैदान पर बनी वाइड लाइन को मुख्य आधार माना जाता है।

क्यों बनाया गया वाइड का नियम?

क्रिकेट की शुरुआत में वाइड का नियम नहीं था। लेकिन जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, गेंदबाज जानबूझकर बल्लेबाज से बहुत दूर गेंद फेंकने लगे ताकि रन बनाने के मौके कम हो जाएं। इसे खेल भावना के खिलाफ माना गया। आईसीसी (ICC) ने यह नियम इसलिए बनाया ताकि बल्लेबाज और गेंदबाज के बीच मुकाबला निष्पक्ष रहे और खेल में रन बनने की गति बनी रहे।

वाइड बॉल के 5 प्रमुख नियम

  1. बल्लेबाज की पहुंच से बाहर: यदि गेंद बल्लेबाज की पहुंच से इतनी दूर है कि वह शॉर्ट नहीं खेल सकता, तो वह वाइड है।
  2. अतिरिक्त रन: वाइड बॉल होने पर बल्लेबाजी टीम को 1 एक्स्ट्रा रन मिलता है। यदि विकेटकीपर से गलती हो और गेंद बाउंड्री तक जाए, तो वे रन भी वाइड के खाते में जुड़ते हैं।
  3. ओवर की गिनती: वाइड बॉल 6 वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। गेंदबाज को वह गेंद फिर से डालनी पड़ती है।
  4. आउट होने की स्थिति: वाइड गेंद पर बल्लेबाज बोल्ड, कैच या LBW नहीं हो सकता। हालांकि, वह स्टंप आउट, रन आउट या हिट विकेट हो सकता है।
  5. नो-बॉल से टकराव: यदि कोई गेंद वाइड और नो-बॉल दोनों की श्रेणी में आती है, तो उसे सिर्फ नो-बॉल माना जाता है।

नए नियमों से बदली बाजी

आईसीसी ने हाल के वर्षों में नियमों को और स्पष्ट किया है। पहले बल्लेबाज क्रीज में खिसक कर गेंदबाज को वाइड फेंकने के लिए मजबूर करते थे। अब, अंपायर पॉइंट ऑफ डिलीवरी (गेंद छूटने के समय) पर बल्लेबाज की पोजीशन देखते हैं। यदि बल्लेबाज शॉट खेलने की तैयारी में अपनी जगह बदलता है, तो अब हर गेंद को वाइड नहीं माना जाएगा।

टेस्ट बनाम वनडे और टी20

वाइड बॉल के नियमों में फॉर्मेट के हिसाब से नरमी और सख्ती देखी जाती है। टेस्ट क्रिकेट में अंपायर लेग साइड की गेंदों पर थोड़े नरम रहते हैं और बहुत ज्यादा बाहर जाने वाली गेंदों को ही वाइड देते हैं। इसके विपरीत, वनडे और टी20 में वाइड के नियम अधिक सख्त होते हैं ताकि खेल का रोमांच और रन-रेट बना रहे।

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