सामुदायिक भवन बना भूसा-घर: करोड़ों की सरकारी संपत्ति उपेक्षा का शिकार
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किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड की तातपौआ पंचायत में सरकारी धन की बर्बादी की एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद की पहल पर ग्रामीणों की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से बनाया गया सामुदायिक भवन आज अपनी पहचान खो चुका है। जन-कल्याण के लिए निर्मित यह इमारत अब ग्रामीणों के लिए जलावन (लकड़ी) और पशुओं का भूसा रखने का गोदाम बनकर रह गई है।

साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं, ताले में कैद हैं उम्मीदें भवन के भीतर और आसपास का नजारा प्रशासनिक लापरवाही की गवाही देता है। यहां न तो कोई सार्वजनिक गतिविधि होती है और न ही इसकी देखरेख का कोई जिम्मा लेने वाला है। भवन के दरवाजे लंबे समय से बंद हैं, जिससे स्पष्ट है कि इसे कभी किसी सामाजिक कार्य या सरकारी प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल ही नहीं किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जिस भवन में सामूहिक बैठकें और स्वास्थ्य शिविर लगने चाहिए थे, वहां अब केवल कूड़ा-कचरा और घरेलू सामान का डेरा है।

ग्रामीणों का दर्द: व्यवस्था नहीं, तो संपत्ति का क्या लाभ? स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भवन बनने के वक्त उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन पंचायत और संबंधित विभाग ने इसे भगवान भरोसे छोड़ दिया। रख-रखाव के अभाव में धीरे-धीरे लोगों ने इसे निजी उपयोग (सामान रखने) के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, अगर प्रशासन ने इसे लेकर जवाबदेही तय की होती, तो आज यह पंचायत की गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन सकता था।

क्या कहते हैं जिम्मेदार? इस मामले पर मुखिया प्रतिनिधि रसमुद्दीन फैज़ ने सफाई देते हुए बताया कि यह भवन पंचायत सरकार भवन के ठीक पीछे स्थित है। उनका मानना है कि एक ही परिसर में दो भवन होने के कारण इसके उपयोग में बाधा आ रही है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों को कई बार परिसर में जलावन और फसल रखने से मना किया गया है, लेकिन लोग नहीं मान रहे हैं।

सरकारी संपत्तियों की निगरानी पर बड़ा सवाल यह मामला सिर्फ एक भवन के खस्ताहाल होने का नहीं है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की विफलता को भी दर्शाता है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद निर्माण कार्य तो पूरा कर लिया जाता है, लेकिन उनके संचालन और मॉनिटरिंग के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई जाती। स्थानीय लोगों को अब इंतजार है कि क्या प्रशासन इस भवन का अतिक्रमण हटाकर इसे वापस जनता के लिए उपयोगी बनाएगा या यह इमारत केवल कागजों में ही सामुदायिक भवन बनी रहेगी।

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