8 महीने का वादा, 19 महीने का इंतजार: ठाकुरगंज-चतरहाट रेल प्रोजेक्ट की कछुआ चाल से बढ़ी चिंता
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ठाकुरगंज (किशनगंज): सीमांचल की लाइफलाइन मानी जाने वाली ठाकुरगंज-चतरहाट नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना फिर से सवालों के घेरे में है। सूचना के अधिकार (RTI) से मिले जवाब ने इस प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है।

RTI में रेलवे ने स्वीकारी सुस्ती

RTI के आधिकारिक खुलासे के अनुसार, 24.40 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) का काम 5 दिसंबर 2024 को पुणे की मोनार्क सर्वेयर्स एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को सौंपा गया था। अनुबंध के अनुसार, यह काम 8 महीने में पूरा होना था। हालांकि, 26 जून 2026 तक दिए गए जवाब में रेलवे ने स्वीकार किया कि सर्वे अभी भी प्रगति पर है और इसकी अंतिम रिपोर्ट तक तैयार नहीं है।

सर्वे में देरी से प्रोजेक्ट पर लटक तलवार

रेलवे निर्माण में फाइनल लोकेशन सर्वे सबसे अहम कड़ी होता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में भूमि अधिग्रहण, DPR निर्माण और बजट का आवंटन तय होता है। सर्वे पूरा न होने का मतलब है कि प्रोजेक्ट अभी भी अपने शुरुआती बिंदु पर ही अटका हुआ है। जानकारों का कहना है कि इस देरी से पूरी परियोजना की लागत बढ़ने के साथ ही इसके शुरू होने में कई वर्षों का विलंब हो सकता है।

चिकन नेक के लिए गेम-चेंजर है यह रेल मार्ग

यह रेल लाइन केवल स्थानीय कनेक्टिविटी का साधन नहीं है, बल्कि देश के सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील चिकन नेक कॉरिडोर को मजबूत करने की एक बड़ी योजना है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल सीमांचल के निवासियों को बेहतर आवागमन मिलेगा, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी विकास की नई राहें खुलेंगी।

अन्य परियोजनाओं का भी वही हाल?

RTI के दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि सिर्फ ठाकुरगंज-चतरहाट ही नहीं, बल्कि फोर्ब्सगंज-लक्ष्मीपुर और कुमेदपुर-अंबारी फालाकाटा जैसी रणनीतिक परियोजनाओं के सर्वे को भी मंजूरी मिली थी। इन परियोजनाओं के साथ भी यही सुस्ती देखी जा रही है, जो सीमांचल में रेल नेटवर्क विस्तार के दावों पर सवालिया निशान लगाती है।

अब जवाबदेही का सवाल

करोड़ों रुपये का कार्यादेश और रेलवे बोर्ड की औपचारिक मंजूरी मिलने के बावजूद सर्वे का तय समय सीमा में पूरा न होना बड़ी प्रशासनिक विफलता माना जा रहा है। स्थानीय जनता अब रेलवे प्रशासन से स्पष्टीकरण मांग रही है कि आखिर देरी के लिए कौन जिम्मेदार है और इस महत्वपूर्ण सामरिक प्रोजेक्ट को कब तक धरातल पर उतारा जाएगा। रेलवे ने फिलहाल पल्ला झाड़ते हुए केवल सर्वे जारी होने की रटी-रटाई बात कही है।

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