महुआ मोइत्रा पर हमला: TMC सांसद 4 घंटे रहीं बंधक, अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंची गुंडागर्दी
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार का दिन हिंसा और बवाल के नाम रहा। नादिया जिले के कालीगंज में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को उनके ही पार्टी दफ्तर में करीब चार घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उन पर अंडे, पत्थर और कीचड़ बरसाए गए।

इंटरनेशनल हुई शिकायत महुआ मोइत्रा ने इस मामले की शिकायत सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की है। उन्होंने इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) को टैग करते हुए ट्वीट किया, देखें कि कैसे बंगाल पुलिस मूकदर्शक बनी रही, जबकि बीजेपी की भीड़ ने मेरे दफ्तर पर हमला किया। एक विपक्षी सांसद को कोई सुरक्षा नहीं मिल रही है। उन्होंने घटना के दौरान डीजीपी और स्थानीय पुलिस को भी टैग कर तुरंत कार्रवाई की मांग की थी।

चार घंटे तक चली गुंडागर्दी घटना तब शुरू हुई जब कालीगंज में एक मीटिंग के दौरान बीजेपी के कथित समर्थकों की भारी भीड़ ने दफ्तर को चारों तरफ से घेर लिया। महुआ मोइत्रा द्वारा साझा किए गए वीडियो में खिड़कियों पर पत्थर और अंडे फेंके जाते साफ देखे जा सकते हैं। सांसद का आरोप है कि पुलिस बल घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बनी रही, जिससे हमलावरों के हौसले बुलंद थे।

पुलिस और सांसद में तनातनी इस घटना के बाद आरोपों का दौर शुरू हुआ। महुआ मोइत्रा ने इसे बीजेपी प्रायोजित हिंसा और पुलिस की मिलीभगत बताया। वहीं, कृष्णानगर के एसपी अतुल वी ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। पुलिस का दावा है कि उन्होंने सांसद को सुरक्षित निकालने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन सांसद और पुलिस के बीच लंबी चर्चा के बाद आखिरकार शाम 6 बजे उन्हें कड़ी सुरक्षा में बाहर निकाला गया।

अभिषेक बनर्जी की सख्त चेतावनी इस हमले ने टीएमसी खेमे में हड़कंप मचा दिया है। पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया है। अभिषेक ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के सुरक्षा निर्देशों के बावजूद ऐसी घटना गंभीर सवाल उठाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक रसूख हमेशा नहीं रहता और गुंडागर्दी करने वालों को अंजाम के लिए तैयार रहना चाहिए।

क्या बंगाल में बढ़ रहा है तनाव? सिर्फ कालीगंज ही नहीं, बल्कि दुर्गापुर से भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां राज्यसभा सांसद डोला सेन को बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध और काले झंडों का सामना करना पड़ा। डोला सेन वहां एक रक्तदान शिविर में हिस्सा लेने गई थीं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाए जाने की इन घटनाओं ने बंगाल के सियासी पारे को गरमा दिया है।

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