दोहा में पर्दे के पीछे का खेल: US-ईरान के बीच परमाणु, फंड और होर्मुज पर क्या हुआ तय?
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दोहा की बंद कमरों वाली बातचीत ने दुनिया की नजरें अपनी ओर खींच ली हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह अप्रत्यक्ष कूटनीति किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में चली इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधि एक ही छत के नीचे थे, लेकिन वे कभी आमने-सामने नहीं आए। सारा संवाद बिचौलियों के जरिए पूरा किया गया।

न्यूक्लियर साइट्स: क्या कुछ छुपा रहा है ईरान? इस बातचीत का सबसे विवादास्पद पहलू ईरान की न्यूक्लियर साइट्स हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने साफ कर दिया है कि हाल के हमलों में क्षतिग्रस्त हुई न्यूक्लियर साइट्स की जांच की अनुमति किसी भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को नहीं दी जाएगी। ईरान केवल बुशहर जैसे चुनिंदा पावर प्लांट्स तक ही IAEA की पहुंच सीमित रखना चाहता है। यह नो-एंट्री का रुख वैश्विक शक्तियों के लिए चिंता का बड़ा विषय बना हुआ है।

3 बिलियन बनाम 6 बिलियन का पेचीदा गणित बैठक का एक मुख्य एजेंडा ईरान के फ्रीज किए गए अरबों डॉलर थे। रिपोर्ट के अनुसार, कतर में अटके ईरान के 3 अरब डॉलर रिलीज करने पर एक शुरुआती सहमति बनी है, जिसका उपयोग जरूरी सामान खरीदने के लिए किया जाएगा। हालांकि, असली विवाद 6 अरब डॉलर की अन्य संपत्ति पर है। ईरान पूरी रकम एक साथ चाहता है, जबकि अमेरिका इसे धीरे-धीरे और परमाणु रियायतों से जोड़कर देना चाहता है।

होर्मुज स्ट्रेट का तनाव और समुद्री सुरक्षा बातचीत के दौरान दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट पर भी तीखी बहस हुई। ईरान ने स्पष्ट किया है कि इस जलमार्ग पर केवल ईरान और ओमान का संप्रभु अधिकार है। ईरान ने इजराइल पर लेबनान में अस्थिरता पैदा कर शांति प्रक्रिया बिगाड़ने का आरोप लगाया है। तनाव कम करने के लिए ओमान ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिस पर आगे चर्चा की जाएगी।

इमरजेंसी कम्युनिकेशन चैनल: क्या टलेगा महायुद्ध? तमाम विरोधाभासों के बीच, कतर की मध्यस्थता में एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है: एक इमरजेंसी कम्युनिकेशन चैनल का गठन। यह 24 घंटे काम करने वाला सिस्टम किसी भी संभावित विवाद को सीधा सैन्य टकराव में बदलने से रोकेगा। दोनों पक्षों ने इसे समझौते के उल्लंघन को रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में देखा है।

आगे क्या? हालांकि वार्ता में सकारात्मक प्रगति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम सहमति अभी दूर है। परमाणु निरीक्षण और प्रतिबंधों में ढील जैसे बड़े मुद्दों पर अभी भी गतिरोध बरकरार है। अगली महत्वपूर्ण बैठक ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बाद तय की गई है। क्या यह कूटनीतिक कोशिश विश्व युद्ध के खतरे को टाल सकेगी, या यह केवल वक्त काटने की रणनीति है? पूरी दुनिया अब अगली बैठक के नतीजों का इंतजार कर रही है।

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