कटिहार: उम्मीदों के साथ खुले 7 नए डिग्री कॉलेज, पहले ही दिन प्रशासनिक लेटलतीफी की भेंट चढ़ी पढ़ाई
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कटिहार के सुदूर ग्रामीण अंचलों में उच्च शिक्षा की अलख जगाने के उद्देश्य से शुरू किए गए 7 नए राजकीय डिग्री कॉलेजों का आगाज निराशाजनक रहा है। सात निश्चय पार्ट-3 के तहत पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा इन कॉलेजों में 1 जुलाई से नियमित कक्षाएं शुरू होनी थीं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर व्यवस्था के कारण पहले ही दिन ताले नजर आए।

एडमिशन की तारीख बढ़ते ही थमी पढ़ाई कॉलेजों में पठन-पाठन शुरू करने की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐन वक्त पर नामांकन की द्वितीय मेरिट लिस्ट की तिथि 30 जून से बढ़ाकर आगे कर दी। इसी तकनीकी अड़चन का हवाला देते हुए कक्षाएं शुरू नहीं की गईं, जिससे पहले दिन कॉलेज पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

प्रशासनिक ढांचा तैनात, पर क्लास का अता-पता नहीं राजभवन के स्पष्ट निर्देशों के बाद पूर्णिया विश्वविद्यालय ने इन कॉलेजों के संचालन के लिए वरिष्ठ प्राध्यापकों को प्रभारी प्राचार्य और अर्थपाल (Bursar) के रूप में तैनात किया था। पुराने कॉलेजों से लिपिकीय और प्रशासनिक स्टाफ भी प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए। इतना बड़ा प्रशासनिक तामझाम खड़ा करने के बावजूद कक्षाएं शुरू न हो पाना सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।

छात्रों में भारी असमंजस इन कॉलेजों में सीटों के मुकाबले नामांकन की संख्या काफी कम है। शिक्षकों की नियमित उपलब्धता और शैक्षणिक सत्र के भविष्य को लेकर छात्र असमंजस में हैं। छात्रों का कहना है कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि उनका सत्र कब शुरू होगा और परीक्षा की तैयारी कैसे होगी।

इन 7 प्रखंडों में स्थिति जस की तस: ये नए कॉलेज फिलहाल अस्थायी रूप से स्कूलों के परिसरों में चल रहे हैं:

पुराने कॉलेजों में पढ़ाई शुरू, नए पर अब भी ब्रेक पूर्णिया विश्वविद्यालय ने एक आदेश जारी कर 1 जुलाई से पुराने सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUGP) की कक्षाएं अनिवार्य रूप से शुरू कर दी हैं। इन कॉलेजों में 75% उपस्थिति अनिवार्य की गई है, जिसके बिना परीक्षा फॉर्म भरना संभव नहीं होगा। वहीं, नए 21 कॉलेजों को इस आदेश से बाहर रखा गया है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार? विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष (DSW) प्रो. एके वर्मा ने कहा, नए कॉलेजों में नामांकन और तकनीकी अड़चनों की समीक्षा की जा रही है। राजभवन और कुलपति कार्यालय से हरी झंडी मिलते ही इंडक्शन मीटिंग और पठन-पाठन युद्ध स्तर पर शुरू कराया जाएगा।

फिलहाल, कटिहार के ग्रामीण छात्र अब भी विश्वविद्यालय की अगली अधिसूचना के इंतजार में हैं।

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