मिशन 2027: जयंत चौधरी ने केसी त्यागी को बनाया रालोद का सार्थी , क्या बदलेगी वेस्ट यूपी की सियासी तस्वीर?
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राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने मिशन 2027 की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी में शामिल होने के महज तीन महीने के भीतर पूर्व सांसद केसी त्यागी को रालोद संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर जयंत ने बड़ा दांव खेला है।

केसी त्यागी का कद बढ़ा, रालोद में नंबर दो की भूमिका संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर जयंत चौधरी ने केसी त्यागी को पार्टी में सीधे तौर पर दूसरे नंबर की हैसियत दी है। इस बोर्ड में जयंत खुद भी शामिल हैं, लेकिन त्यागी को कमान सौंपकर उन्होंने साफ कर दिया है कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति में उनकी भूमिका निर्णायक होगी।

सियासी संतुलन और जातियों का गठजोड़ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीए गठबंधन में होने के बावजूद जयंत चौधरी सतर्क हैं। एनडीए के साथ आने से वेस्ट यूपी में रालोद के पारंपरिक जाट-मुस्लिम समीकरण में बदलाव की संभावना है। ऐसे में केसी त्यागी के जरिए जयंत अब ब्राह्मण समाज और अन्य जातियों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। त्यागी को गठबंधन की राजनीति का महारथी माना जाता है, जिसका लाभ रालोद को 2027 में मिल सकता है।

बेटे अंबरीश त्यागी की भूमिका से मिल रहे संकेत जयंत की सक्रियता सिर्फ केसी त्यागी तक सीमित नहीं है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, त्यागी के बेटे अंबरीश त्यागी को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें टीम आरएलडी का संयोजक बनाकर 2027 के चुनाव की जमीनी तैयारी दी गई है। यह कदम संकेत देता है कि त्यागी परिवार अब रालोद की चुनावी इबारत लिखने में अहम भूमिका निभाएगा।

15 सदस्यीय थॉट टैंक तैयार रालोद के इस नवनिर्वाचित संसदीय बोर्ड में अध्यक्ष केसी त्यागी समेत 15 सदस्य और 4 विशेष आमंत्रित सदस्य रखे गए हैं। इसमें मलूक नागर, डॉ. राजकुमार सांगवान, राजपाल बलियान और योगेश चौधरी जैसे दिग्गज नेताओं को जगह मिली है। साथ ही, दिल्ली और राजस्थान के किसान नेताओं को भी शामिल कर इसे व्यापक आधार देने की कोशिश की गई है।

रणनीति: संगठन और सत्ता के बीच तालमेल पार्टी का मानना है कि इस बोर्ड के गठन से संसद और विधानसभा में किसानों, युवाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को अधिक मजबूती मिलेगी। केसी त्यागी का तजुर्बा और जयंत की युवा ऊर्जा का मेल क्या रालोद को 2027 में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि रालोद ने अपने पत्ते खोल दिए हैं।

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