केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर नियमों में बदलाव किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 10वीं कक्षा के मौजूदा छात्रों पर यह पॉलिसी लागू नहीं होगी। वहीं, 9वीं कक्षा के छात्र दो विदेशी और एक भारतीय भाषा का विकल्प चुन सकेंगे। इस फैसले के बाद से शिक्षकों और विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है।
इस नीति पर शिक्षकों के विचार बंटे हुए हैं। रांची के सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रिंसिपल फूलदेव सोरेंग का मानना है कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भाषाई और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाना है। वे कहते हैं कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में कम से कम दो भारतीय भाषाओं का ज्ञान छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए अनिवार्य है।
प्रिंसिपल सोरेंग का कहना है कि आज के दौर में फ्रेंच, जर्मन और जापानी जैसी भाषाओं की मांग बहुत अधिक है और ये भविष्य में करियर के नए आयाम खोल सकती हैं। लेकिन, उनका यह भी तर्क है कि विदेशी भाषाओं के चक्कर में भारतीय भाषाओं को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए। मातृभाषा और भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा की पहचान हैं।
पटना के डीवाई पाटिल स्कूल के पीजीटी शिक्षक अमित कुमार श्रीवास्तव ने CBSE के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने मौजूदा छात्रों को जो राहत दी है, वह यह दर्शाता है कि किसी भी नीति को लागू करते समय व्यावहारिक (practical) होना जरूरी है। बिना सोचे-समझे नियम लागू करने से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है।
शिक्षक अमित कुमार श्रीवास्तव स्पष्ट करते हैं कि विदेशी भाषा सीखना निश्चित रूप से लाभदायक है, लेकिन इसे भारतीय भाषाओं का रिप्लेसमेंट नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि विदेशी भाषाएं केवल पूरक (supplement) होनी चाहिए। अपनी जड़ों और भाषा से दूर रहकर छात्र का सर्वांगीण विकास अधूरा रह जाता है।
CBSE के ताज़ा निर्देशों के अनुसार, कक्षा 7वीं, 8वीं और 9वीं के वर्तमान बैच के छात्रों को तीसरी भाषा में बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। बोर्ड का उद्देश्य नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत विदेशी भाषाओं की डिमांड और भारतीय भाषाओं के महत्व के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाना है। हालांकि, यह बहस जारी है कि क्या यह संतुलन छात्रों के भविष्य के लिए पर्याप्त है।
*CBSE issues guidelines on the three-language policy.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 29, 2026
•The current batch of class X will not have to follow the new language policy.
• For the current batches studying in class VII, VIII and IX would not be required to give board examination in third language when they… pic.twitter.com/EbfmnPiIDw
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