दक्षिण अफ्रीका इस समय एक गंभीर मानवीय और सामाजिक संकट की चपेट में है। देश के विभिन्न हिस्सों में विदेशी नागरिकों के खिलाफ नफरत की लहर दौड़ गई है। स्थानीय कट्टरपंथी समूहों द्वारा दी गई 30 जून की डेथ वारंट जैसी समय सीमा के चलते अब तक करीब 25,000 प्रवासी देश छोड़कर भाग चुके हैं।
सड़कों पर खौफनाक मंजर राजधानी और प्रमुख शहरों की सड़कों पर डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोग हाथों में लाठी, डंडे और ढाल लेकर घूम रहे हैं और विदेशी नागरिकों की तलाश कर रहे हैं। कई इलाकों में आम नागरिक खुद ही विदेशियों के दस्तावेज जांचने और उन्हें उनके घरों या कार्यस्थलों से जबरन बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। हिंसा के बीच अब तक मोजाम्बिक के दो और मलावी के एक नागरिक की बर्बर हत्या की खबर ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।
क्यों निशाने पर हैं विदेशी नागरिक? इस हिंसक आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से जुलु परिधान पहने समूह कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि प्रवासियों के कारण अपराध बढ़ रहे हैं और स्थानीय लोगों के रोजगार छिन रहे हैं। 33 प्रतिशत की रिकॉर्ड बेरोजगारी और आर्थिक मंदी से जूझ रहे दक्षिण अफ्रीका में लोग अपनी हताशा का गुस्सा विदेशियों पर निकाल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ब्लैक-ऑन-ब्लैक हिंसा का एक वीभत्स रूप है, जहाँ संसाधनों की कमी के चलते एक ही समुदाय के लोग आपस में लड़ रहे हैं।
राजनीति और अफवाहों का खेल विश्लेषकों का मानना है कि इस तनाव के पीछे आगामी नगर-निगम चुनाव और दक्षिणपंथी दलों की अवसरवादी राजनीति है। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज ने आग में घी का काम किया है। गौर करने वाली बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका में प्रवासियों की संख्या कुल आबादी का सिर्फ 5.1 प्रतिशत (लगभग 30 लाख) है, फिर भी उन्हें देश की आर्थिक बदहाली का बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
सरकार और सुरक्षाबलों की चुनौती 30 जून की डेडलाइन को देखते हुए सरकार ने पूरे देश में भारी पुलिस बल तैनात किया है, ताकि 2021 के दंगों जैसे हालात दोबारा न बनें, जिनमें 350 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। बॉर्डर मैनेजमेंट अथॉरिटी (BMA) के अनुसार, लोग बड़ी संख्या में जिम्बाब्वे, मलावी, नाइजीरिया और घाना जैसे देशों की ओर पलायन कर रहे हैं। केन्या, युगांडा और कांगो जैसे देशों ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम शुरू कर दिए हैं। सरकार ने लोगों से कानून अपने हाथ में न लेने की कड़ी चेतावनी दी है।
South Africa is braced for nationwide anti-illegal migrants protests on Tuesday June 30th - a deadline set by civil rights activists demanding undocumented foreigners to leave the country by the 30th of June. The gov byt has fully rejected the shutdown and deployed heavily. pic.twitter.com/Fhy4IDDfkV
— Kenya News Centre🇰🇪 (@KenyaNewsCentre) June 30, 2026
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