खगड़िया में खाद वितरण का डिजिटल कायाकल्प: अब QR कोड से मिलेगी यूरिया-डीएपी
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खगड़िया: जिले में खाद की किल्लत और कालाबाजारी पर नकेल कसने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। जल्द ही खगड़िया में खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने जा रही है। अब किसानों को खाद पाने के लिए किसी दुकान के बाहर लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि डिजिटल बुकिंग के माध्यम से ही उर्वरक मिल सकेगा।

केवल बुकिंग से नहीं, QR कोड से होगा वितरण

नई व्यवस्था के तहत, किसानों को सबसे पहले ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी बुकिंग करानी होगी। प्रक्रिया पूरी होते ही किसान को एक QR कोड और बुकिंग आईडी दी जाएगी। अधिकृत विक्रेता के पास जाकर यह कोड दिखाते ही खाद मुहैया करा दी जाएगी। विभाग ने इस कोड की वैधता 3 दिन तय की है, जिसके बाद बुकिंग स्वतः रद्द हो जाएगी।

कालाबाजारी और फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

हर सीजन में खाद की जमाखोरी और फर्जी खरीद की खबरें आम होती हैं। कृषि विभाग का मानना है कि फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम से जुड़ने के बाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। यह सिस्टम किसान की भूमि और उनकी वास्तविक जरूरत को ट्रैक करेगा, जिससे बिचौलियों द्वारा की जाने वाली धांधली पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

बटाईदार किसानों के लिए भी द्वार खुले

इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें सिर्फ जमीन के मालिक ही नहीं, बल्कि बटाईदार और किराए पर खेती करने वाले किसान भी शामिल हैं। वर्षों से अपनी जमीन न होने के कारण खाद सब्सिडी व सरकारी लाभ से वंचित रहने वाले हजारों बटाईदार किसानों को अब सीधे तौर पर उर्वरक मिल सकेगा।

स्मार्टफोन न होने पर भी मिलेगी सुविधा

ग्रामीण इलाकों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट की कमी को देखते हुए विभाग ने बैकअप प्लान तैयार रखा है। जिन किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है, वे अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), वसुधा केंद्र, पैक्स प्रतिनिधियों या कृषि सलाहकारों के माध्यम से पंजीकरण करवा सकते हैं।

जल्द शुरू होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस नई प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभाग का दावा है कि इस पहल से न केवल किसानों का समय बचेगा, बल्कि खाद की सुगम उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

अब देखना यह है कि खगड़िया के किसान इस आधुनिक डिजिटल बदलाव को कितनी जल्दी अपनाते हैं और क्या यह वाकई खाद संकट का स्थायी समाधान साबित होता है।

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