यूपी चुनाव 2027: अखिलेश यादव की बढ़ी टेंशन, सीट शेयरिंग पर कांग्रेस की बड़ी डिमांड से गठबंधन में रार?
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अभी तारीखों का ऐलान भले ही न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात बिछ चुकी है। इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख साथी—समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर तलवारें खिंचती नजर आ रही हैं। कांग्रेस के नए तेवर ने सपा मुखिया अखिलेश यादव की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

राजेंद्र पाल गौतम का पावर गेम हाल ही में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक बयान देकर यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उसे गठबंधन में बराबर की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, सीटों का बंटवारा बराबरी के सम्मान के साथ होना चाहिए।

क्या है कांग्रेस की असली मंशा? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बराबर की हिस्सेदारी की मांग का मतलब है कि कांग्रेस राज्य की आधी सीटों पर अपना दावा ठोक रही है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस चुनाव में लगभग 150 सीटों की मांग कर सकती है। वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 70 से 80 से ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है।

सपा का जीत का फॉर्मूला समाजवादी पार्टी चुनावी गणित को लेकर काफी सतर्क है। सपा का मानना है कि केवल संख्या के आधार पर सीटें नहीं बांटी जानी चाहिए। अखिलेश यादव की पार्टी का नया फॉर्मूला विनेबिलिटी (जीत की गारंटी) पर टिका है। सपा उन सीटों पर ही समझौता करना चाहती है जहां गठबंधन का उम्मीदवार जीत पक्की कर सके। इसके लिए पार्टी जनाधार और पिछले चुनावों के आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है।

अखिलेश के सामने बड़ी दुविधा अखिलेश यादव के लिए फिलहाल यह स्थिति सांप-छछूंदर जैसी है। वे मुख्यमंत्री की कुर्सी के प्रबल दावेदार हैं और इस लक्ष्य के लिए उन्हें कांग्रेस का साथ चाहिए। कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने पर पार्टी का अपना वोट बैंक सिमटने का डर है, लेकिन उन्हें नाराज करने पर दलित और ब्राह्मण वोटों के छिटकने की आशंका भी बनी हुई है।

बढ़ते दबाव की राजनीति राजेंद्र पाल गौतम का यह बयान महज एक मांग नहीं, बल्कि दबाव बनाने की रणनीति है। कांग्रेस जानती है कि बिना उनके समर्थन के सपा के लिए सत्ता की राह कठिन हो सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या अखिलेश यादव पुरानी शर्तों पर समझौता करेंगे या कांग्रेस को संतुष्ट करने के लिए अपनी ज्यादा सीटें कुर्बान करेंगे। चुनाव करीब आते-आते यह रार गठबंधन के भविष्य की दिशा तय करेगी।

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