इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के निवासियों को लेकर की गई एक टिप्पणी ने बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान आसिफ ने दावा किया कि रावलाकोट और मीरपुर के लोग असली कश्मीरी नहीं हैं । इस बयान ने क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
PoK नेताओं का कड़ा पलटवार इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए PoK के नेता फैसल मुमताज राठौर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए ख्वाजा आसिफ के किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। राठौर ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री का यह बयान केवल समाज में विभाजन पैदा करने की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आसिफ से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने की भी मांग की है।
मानवाधिकार परिषद और अंतरराष्ट्रीय जगत की कड़ी निंदा पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (HRC) ने भी इस बयान की आलोचना की है। परिषद ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को जातीय और पहचान संबंधी मुद्दों पर बोलते समय बेहद जिम्मेदारी बरतनी चाहिए। वहीं, ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों ने भी इस बयान का कड़ा विरोध किया है। ब्रिटिश सांसद लॉर्ड शफीक ने भी इस टिप्पणी को कश्मीरी पहचान को नकारने का एक शर्मनाक प्रयास करार दिया है।
लंदन में सड़कों पर उतरे कश्मीरी प्रवासी इस विवाद की आंच लंदन तक पहुंच गई है। ब्रिटेन में बसे कश्मीरी प्रवासियों ने ब्रिटिश संसद के बाहर प्रदर्शन किया और 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने PoK में मानवाधिकार उल्लंघन, खाद्य आपूर्ति में कटौती और नागरिकों की मौतों जैसे गंभीर मुद्दे उठाए। प्रवासियों का आरोप है कि दवाओं और आवश्यक वस्तुओं की कमी से वहां के नागरिकों का जीवन दूभर हो गया है।
बढ़ता राजनीतिक असंतोष यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब PoK पहले से ही भारी राजनीतिक अस्थिरता और नागरिक विरोध-प्रदर्शनों से जूझ रहा है। विशेषज्ञ इसे सरकार की उस नीति के रूप में देख रहे हैं, जहां वे अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए स्थानीय पहचान पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल, पाकिस्तान सरकार पर इस मामले में स्पष्टीकरण देने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
*Pakistan’s own people mocking them.
— GarudEyeIntel | OSINT 🇮🇳 (@GarudEyeIntel) June 24, 2026
Khawaja Asif is learning the hard way losing five wars doesn’t buy respect. The sharpest criticism is now coming from PoJK Kashmiris themselves, openly ridiculing Islamabad’s imposed governance.
When your own occupied population turns against… pic.twitter.com/4RnNjfkP8d
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