अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की 11 जुलाई को होगी अहम बैठक: क्या गाज गिरेगी बड़े पदाधिकारियों पर?
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अयोध्या में राम मंदिर को मिले दान में कथित गबन और चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस विवाद के बीच 11 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें मंदिर प्रबंधन और भविष्य की कार्यप्रणाली पर कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

ट्रस्ट की बैठक में किन बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी? ट्रस्ट के सदस्य उडुपी पीठाधीश्वर विश्व तीर्थ प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने स्पष्ट किया है कि बैठक में दान गबन के पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव पद, नए सदस्य की नियुक्ति और परिसर के लिए सीईओ (CEO) की नियुक्ति पर भी विचार किया जा सकता है।

दानदाताओं का छलका दर्द गबन की खबरों के बाद मंदिर में आस्था रखने वाले दानदाता व्यथित हैं। एक करोड़ रुपये का दान देने वाले समाजसेवी सियाराम उमरवैश्य ने कहा कि उन्होंने अपनी जमीन बेचकर राम काज के लिए राशि दी थी, लेकिन अब भ्रष्टाचार की खबरें सुनकर उन्हें गहरा दुख हुआ है। सिंधी समाज और महिला भक्तों ने भी चांदी की ईंट और गहने भेंट करने के बाद रसीद न मिलने जैसी गंभीर शिकायतें की हैं।

शंकराचार्य और कानूनविदों के तीखे सवाल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रस्ट का गठन ही विश्वस्त लोगों को सेट करने के लिए किया गया था, जिसका खामियाजा अब सामने आ रहा है। वहीं, प्रसिद्ध वकील हरि शंकर जैन ने इसे चोरी और गबन का मामला करार देते हुए भविष्य के लिए एक पारदर्शी सिस्टम बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि केवल आरोप पर इस्तीफा ठीक नहीं, लेकिन दोष साबित होने पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

राजनीतिक घमासान: विपक्ष बनाम सरकार उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मामले को विपक्षी दलों की सुनियोजित साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है और पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है और आठ लोगों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।

आगे की राह क्या? फिलहाल अयोध्या पुलिस की एसआईटी (SIT) इस मामले की जांच कर रही है। 11 जुलाई की बैठक न केवल भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए, बल्कि ट्रस्ट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भी अग्निपरीक्षा साबित होगी। भक्त अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या ट्रस्ट वाकई पारदर्शिता लाने के लिए कोई बड़ा बदलाव करेगा।

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