NCERT की किताब में मनुस्मृति : ज्ञान के एक श्लोक पर आखिर इतना विवाद क्यों?
News Image

नई दिल्ली: हाल ही में NCERT द्वारा कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में मनुस्मृति को शामिल करने का निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है। पाठ्यक्रम के State and Society up to 1000 CE (1000 ईस्वी तक राज्य और समाज) अध्याय में मनुस्मृति के एक श्लोक का उल्लेख करने पर कुछ समूहों ने तीखा विरोध जताना शुरू कर दिया है।

क्या है NCERT का तर्क? नई किताब में मनुस्मृति के अध्याय 3 के 56वें श्लोक को जगह दी गई है। इसमें कहा गया है— यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: यानी, जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं। NCERT का उद्देश्य छात्रों को प्राचीन भारतीय समाज में महिलाओं की उस उच्च स्थिति से परिचित कराना है, जहां उन्हें धार्मिक अनुष्ठानों और सार्वजनिक सभाओं में पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त थे।

पूर्वाग्रह से ग्रसित विरोध स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि किसी भी पुस्तक का मूल्यांकन उसके समग्र अध्ययन से होना चाहिए, न कि किसी एक पृष्ठ या संदर्भ से। आलोचकों का एक वर्ग 1927 में डॉ. बी.आर. आंबेडकर द्वारा मनुस्मृति दहन के ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देते हुए इस फैसले का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि यह किताब जातिगत विभेद को बढ़ावा देने वाली रही है।

किताब में क्या है पूरा सच? विवादास्पद दावों के विपरीत, NCERT ने किताब में निष्पक्षता बरती है। पुस्तक में स्पष्ट किया गया है कि वैदिक काल के बाद समय और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते महिलाओं की स्थिति में बदलाव आए और गिरावट भी देखी गई। साथ ही, इसमें वर्ण और जाति व्यवस्था पर भी चर्चा की गई है, जो यह बताती है कि शुरुआती वैदिक समाज में सामाजिक पहचान पूरी तरह जन्म आधारित नहीं थी।

अमृत बनाम विवाद आचार्य चाणक्य ने कहा था कि यदि विष में भी अमृत हो, तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। शैक्षणिक दृष्टि से, मनुस्मृति के उस हिस्से को पढ़ाना जो नारी गरिमा की बात करता है, छात्रों के लिए एक सकारात्मक सीख हो सकती है। दुर्भाग्यवश, समाज का एक वर्ग पुरानी कड़वाहट और पूर्वाग्रहों के चलते उस सकारात्मक पहल को स्वीकार करने के बजाय विरोध की राजनीति कर रहा है।

निष्कर्ष इतिहास को समग्रता में देखना ही बौद्धिक परिपक्वता है। NCERT द्वारा एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रों को प्राचीन ग्रंथों के सकारात्मक पहलुओं से परिचित कराना शिक्षा को व्यापक बनाने का एक प्रयास है। क्या हम इतिहास के उन पन्नों से केवल नफरत चुनेंगे, या उनमें छिपे ज्ञान के अंशों को समझकर भविष्य को बेहतर बनाएंगे? यह अब एक बड़ा सवाल बन चुका है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

मैदान पर बिखरा इंग्लैंड का अनुशासन: कैच छूटने पर स्टोक्स और आर्चर के बीच तीखी बहस

Story 1

विधानसभा की कैंटीन भी इस्कॉन को सौंप दो , मिड-डे मील पर महुआ मोइत्रा का सरकार पर तीखा प्रहार

Story 1

मेस्सी के मैदान में उतरते ही पलटा पासा: जॉर्डन के खिलाफ अर्जेंटीना के मैच में दिलचस्प मोड़

Story 1

पीएम मोदी के 12 साल: सीएम रेखा गुप्ता ने बताया आत्मनिर्भर भारत का नया अध्याय

Story 1

ईरान के 10 ठिकानों पर अमेरिका की भीषण बमबारी, ट्रंप बोले- जरूरत पड़ी तो इस्लामिक रिपब्लिक खत्म कर देंगे

Story 1

2014 में प्रणब दा ने मोदी से क्या कहा था? बरसों बाद बेटी शर्मिष्ठा ने खोला बड़ा राज

Story 1

निको विलियम्स का तीखा हमला: उरुग्वे के खिलाड़ी पर लगाया हताशा का आरोप

Story 1

UN में शांति का ढोल या सुपारी का खेल? भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने वाले अधिकारी का पर्दाफाश

Story 1

कराची दहला: पाक रेंजर्स मुख्यालय पर आत्मघाती हमला, 6 आतंकी ढेर, 4 जवानों की शहादत

Story 1

दिल्ली में असुरक्षित कोचिंग सेंटर्स की खैर नहीं: CM का 1 महीने का अल्टीमेटम, नियम तोड़े तो होगा सीधा सील