राम मंदिर चंदा चोरी: 8 गिरफ्तार, ट्रस्ट के दो दिग्गजों का इस्तीफा; क्या है सच?
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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामभक्तों की आस्था को तार-तार करने वाला बड़ा मामला सामने आया है। मंदिर के दान पात्रों में सेंध लगाकर करोड़ों की चोरी करने के आरोप में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

इस्तीफा क्यों हुआ? भले ही FIR में सीधे तौर पर चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का नाम नहीं है, लेकिन SIT की अंतरिम रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन और दान गणना की प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई गई हैं। मंदिर की व्यवस्था और पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर थी। चंपत राय पर मंदिर के संपूर्ण प्रशासन की जिम्मेदारी थी, जबकि डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य थे। नैतिकता और प्रशासनिक जवाबदेही के चलते दोनों का पद छोड़ना अनिवार्य माना जा रहा है।

आरोपियों का पाप का नेटवर्क पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में चंपत राय का पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव (टिन्नू) और डॉ. अनिल मिश्रा के करीबी अनुकल्प मिश्रा शामिल हैं। टिन्नू के पास मंदिर के दानपात्रों की चाबियां थीं, जबकि अनुकल्प के घर से 20 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने कबूला है कि वे पिछले तीन साल से दान की राशि उड़ा रहे थे। नोटों की गड्डियों को गिनती के दौरान बाथरूम में छिपाया जाता था और मौका मिलते ही उन्हें मंदिर परिसर से बाहर भेज दिया जाता था। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान जब भक्तों की भारी भीड़ थी, तब इस चोरी को सबसे बड़े स्तर पर अंजाम दिया गया। सीसीटीवी फुटेज में 70 बार चोरी की पुष्टि हुई है।

सीजेएम कोर्ट में पेशी और आगे की राह सभी आठ आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने अब तक विभिन्न ठिकानों से करीब 79 लाख रुपये बरामद किए हैं।

क्या कोई अधिकारी भी शामिल है? इस मामले में दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के साथ-साथ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PC Act) की धारा 13(1)A भी लगाई गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस धारा का जुड़ना यह संकेत देता है कि इस पूरे रैकेट में किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की भी संलिप्तता है, जिसकी पहचान अभी अज्ञात के रूप में की गई है।

अब SIT की नजर उन बड़े चेहरों पर है जिन्होंने इस पूरी साजिश में पर्दे के पीछे रहकर सहूलियतें दीं। राम मंदिर की शुचिता को चोट पहुंचाने वालों पर हो रही यह कार्रवाई आने वाले समय में और अधिक बड़े खुलासे कर सकती है।

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