रोती-बिलखती रही मासूम, बेरहमी से पीटती रही मैडम : आंगनवाड़ी में हैवानियत की हदें पार
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नवी मुंबई के नांदगांव गांव से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक आंगनवाड़ी केंद्र पर मासूम बच्ची के साथ की गई बर्बरता का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसे देखकर हर किसी का खून खौल उठा है।

वीडियो में कैद हैवानियत वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक महिला आंगनवाड़ी केंद्र में एक छोटी बच्ची को बुरी तरह पीट रही है। बच्ची लगातार रोकर अपनी जान बचाने की गुहार लगा रही है, लेकिन महिला के दिल में ذरा भी दया नहीं है। आरोपी महिला ने बच्ची को पटक-पटक कर पीटा और उसके सीने पर पैर रखकर लातें भी मारीं। इस क्रूर व्यवहार से बच्ची जमीन पर गिर जाती है और खुद को बचाने के लिए तड़पती नजर आती है।

भरोसे का कत्ल और अभिभावकों का फूटा गुस्सा आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों के लिए सुरक्षित माना जाता है, जहाँ माता-पिता अपने नौनिहाल इसी भरोसे छोड़ते हैं कि उनकी अच्छी देखभाल होगी। इस वीडियो ने उस विश्वास को चकनाचूर कर दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही आक्रोशित ग्रामीण और अभिभावक आंगनवाड़ी केंद्र पर जमा हो गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने आरोपी महिला को तत्काल नौकरी से बर्खास्त करने और उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने लिया एक्शन, शुरू हुई जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए नवी मुंबई पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया है। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, घटना के समय मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और वीडियो की सत्यता की पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच को प्राथमिकता दी जा रही है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

प्रशासन सख्त: बच्चों की सुरक्षा पर विशेष निगरानी प्रशासन ने इस घटना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम को आंगनवाड़ी केंद्र भेजा है। टीम वहां के अन्य बच्चों की सुरक्षा का जायजा ले रही है और केंद्र की कार्यप्रणाली की भी सघन जांच की जा रही है।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के साथ ऐसी क्रूरता के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए। समाज में इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताते हुए लोगों ने मांग की है कि ऐसे केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य हों और स्टाफ की समय-समय पर मानसिक जांच भी होनी चाहिए।

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