उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए बीजेपी ने अपनी कमर कस ली है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम के गठन के साथ ही संगठन को चुनावी मोड़ पर डाल दिया है। शुक्रवार को लखनऊ में नई टीम की पहली बैठक के बाद से ही पार्टी आक्रामक रणनीति पर काम शुरू कर रही है।
बूथ से लेकर क्षेत्र तक मजबूत नेटवर्क बीजेपी ने राज्य के सभी 1.77 लाख बूथों पर न केवल कमेटियां गठित की हैं, बल्कि उनका सत्यापन भी पूरा कर लिया है। शक्ति केंद्र, ग्राम पंचायत और तहसील स्तर तक संगठन को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां करके कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का काम भी पूरा हो चुका है।
सप्ताह में 5 दिन दौरे पर रहेंगे अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पिछले छह महीनों में संगठन को मजबूती देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनकी सक्रियता ने तमाम स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं को गलत साबित किया है। अब नई योजना के तहत, चौधरी सप्ताह में पांच दिन राज्य के दौरे पर रहेंगे और बाकी दो दिन लखनऊ में कार्यों की समीक्षा करेंगे। वे राज्य के सभी छह क्षेत्रों को कवर कर जमीनी हकीकत पर नजर रखेंगे।
हार वाली सीटों पर विशेष ध्यान पार्टी ने उन सीटों पर खास फोकस करने का निर्णय लिया है, जहां पिछले चुनावों में उसे हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जिन 20-22 सीटों पर मुस्लिम आबादी अधिक है और जहां जीतना लगभग नामुमकिन है, वहां अपनी ऊर्जा व्यर्थ करने के बजाय जीतने वाली सीटों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
विवादों की काट: राम मंदिर से पेपर लीक तक बीजेपी राम मंदिर चढ़ावे की चोरी, नीट पेपर लीक और यूजीसी विवाद जैसे मुद्दों से उपजी नकारात्मकता को खत्म करने के लिए सख्त रुख अपना रही है। राम मंदिर मामले में एफआईआर और त्वरित कार्रवाई से जनता के बीच संदेश देने की कोशिश की जा रही है। चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद पार्टी अब डैमेज कंट्रोल में जुटी है, ताकि यह विवाद आगामी चुनावों में भारी न पड़े।
सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल पंकज चौधरी की नई टीम के गठन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राय को अहमियत दी गई है। संगठन और सरकार अब पूरी तरह तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि नई टीम में जगह मिलना विधानसभा चुनाव का टिकट मिलने की गारंटी नहीं है; इस बार केवल विनिबिलिटी (जीतने की क्षमता) ही टिकट का मुख्य पैमाना होगी।
सामाजिक समीकरणों को साधने की कवायद अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले की काट के लिए बीजेपी ने ओबीसी और ब्राह्मण वोट बैंक पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी जातिगत समीकरणों को साधते हुए हिंदुत्व के आधार को भी मजबूत कर रही है। क्या यह नई कवायद 2027 में बीजेपी को फिर से सत्ता दिला पाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
*भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। @NitinNabin @mppchaudhary @idharampalsingh pic.twitter.com/jOu52lsTlc
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) June 25, 2026
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