इस्लामाबाद: बलूचिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री और बलूचिस्तान नेशनल पार्टी के अध्यक्ष अख्तर मेंगल ने पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और आम नागरिकों के गायब होने के मुद्दे पर मेंगल ने सीधे सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को निशाने पर लिया है।
1971 की हार की याद दिलाई अख्तर मेंगल ने पाकिस्तानी सेना की बहादुरी के दावों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें 1971 के युद्ध की याद दिलाई। उन्होंने कहा, हम आपकी बहादुरी 1971 में देख चुके हैं, जब ढाका में आपने घुटने टेककर हथियार डाल दिए थे। दुनिया के सैन्य इतिहास में 90,000 सैनिकों के आत्मसमर्पण का दूसरा उदाहरण नहीं मिलता।
इतिहास की किताबों में सच्चाई दर्ज करने की मांग मेंगल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना को अपनी इतिहास की किताबों में 1971 के सरेंडर को जरूर शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा, अपनी आने वाली पीढ़ियों को सच बताओ कि सेना के हथियार और पतलूनें वहां क्यों टंगी रह गई थीं। यह शर्मनाक अध्याय हर पाकिस्तानी को पता होना चाहिए।
बलूचिस्तान में दमन के खिलाफ आवाज अख्तर मेंगल लंबे समय से बलूचिस्तान में जारी सैन्य ज्यादतियों के खिलाफ मुखर रहे हैं। हाल ही में महरंग बलूच के मामले पर भी उन्होंने सरकार को घेरा था। मेंगल का यह बयान पाकिस्तानी ‘इस्टेब्लिशमेंट’ की सबसे दुखती रग को छूने वाला है, क्योंकि 1971 की हार आज भी पाकिस्तान की सबसे बड़ी शर्मिंदगी मानी जाती है।
इतिहास का वह अध्याय जो पाक को चुभता है 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना ने भीषण अत्याचार किए थे। भारत के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तानी सेना को 90,000 सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने सरेंडर करना पड़ा था। यह घटना पाकिस्तान के दो टुकड़ों में बंटने और एक नए राष्ट्र बांग्लादेश के उदय का आधार बनी थी। मेंगल का यह हमला पाक सेना की वैश्विक छवि और उसकी कार्यप्रणाली पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
In the world s military history, the Pakistan army is the only force that not only surrendered in such huge numbers (90000), but also left behind their Patloons (pants). Why don t we teach that in our history books?
— Pakistan Untold (@pakistan_untold) June 23, 2026
- Akhtar Mengal, ex CM Balochistan
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