वेनेजुएला में मची तबाही, जापान कैसे बच गया? जानिए डबल अर्थक्वेक का खौफनाक सच
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वेनेजुएला में गुरुवार तड़के आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। महज 40 सेकंड के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप ने राजधानी काराकस सहित कई शहरों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। पिछले 126 वर्षों में यह देश का सबसे भीषण भूकंप है।

डबल सिस्मिक इवेंट ने बढ़ाई बर्बादी

वैज्ञानिकों के अनुसार, वेनेजुएला में जो हुआ उसे डबल सिस्मिक इवेंट कहा जाता है। आमतौर पर एक बड़े भूकंप के बाद आफ्टरशॉक आते हैं, लेकिन यहां एक ही इलाके में एक मिनट के भीतर लगभग समान तीव्रता के दो बड़े झटके महसूस किए गए। छुट्टी का दिन होने के कारण लोग अपने घरों में थे, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, मरने वालों की संख्या 10 हजार से लेकर 1 लाख तक हो सकती है।

100 अरब डॉलर का अनुमानित नुकसान

भूकंप से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। एयरपोर्ट की लाइटें कट गईं, इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और कई इलाकों में राहत कार्य के लिए मशीनें तक उपलब्ध नहीं हैं। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने निजी क्षेत्र से सहयोग की अपील की है। अनुमान है कि इस आपदा से वेनेजुएला को 100 अरब डॉलर तक का नुकसान हुआ है, जो देश की जीडीपी का 7% से 20% तक हो सकता है।

जापान क्यों सुरक्षित रहा?

समान तीव्रता का भूकंप जापान में भी आया, लेकिन वहां कोई तबाही नहीं हुई। इसकी दो प्रमुख वजहें हैं:

  1. गहराई का अंतर: वेनेजुएला में भूकंप जमीन की सतह से केवल 10-22 किमी की गहराई पर था, जिससे झटकों की तीव्रता सतह पर अधिकतम रही। वहीं, जापान में यह 50 किमी की गहराई पर आया।
  2. इमारतों की मजबूती और तकनीक: जापान में इमारतें अर्थक्वेक-प्रूफ तकनीक से बनती हैं, जो झटकों के दौरान हिलती हैं लेकिन गिरती नहीं हैं। इसके अलावा, जापान के पास 4,000 सेंसर वाला एक अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम है, जो भूकंप से कुछ सेकंड पहले लोगों को अलर्ट कर देता है।

भारत के लिए सबक

वेनेजुएला का यह संकट एक कड़ा सबक है। टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर बसे होने के कारण दुनिया के कई देशों में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है। वेनेजुएला की तबाही यह साबित करती है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर अर्ली वार्निंग सिस्टम, सख्त निर्माण कोड और आपदा प्रबंधन की तैयारी से हजारों जान बचाई जा सकती हैं।

फिलहाल, भारत ने भी इस मुश्किल घड़ी में वेनेजुएला के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता का हाथ आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता जाहिर की है।

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