महुआ मोइत्रा का ट्रांसलेशन टेस्ट : मीडिया को लगाई फटकार, सुवेंदु और सायनी पर तोड़ी चुप्पी
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टीएमसी की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका हालिया इंटरव्यू है, जिसमें उन्होंने न केवल अपने राजनीतिक विरोधियों को घेरा, बल्कि मीडिया के अनुवाद कौशल पर भी तीखे सवाल उठाए।

मसालेदार खबरों पर भड़कीं महुआ

महुआ मोइत्रा ने एक मीडिया संस्थान को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें अच्छा ट्रांसलेटर रखने की नसीहत दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बीबीसी बांग्ला को दिए अपने इंटरव्यू का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थान जानबूझकर उनके बयानों के जूस वाले हिस्से (juicy bits) चुनते हैं ताकि सनसनी फैलाई जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्थ का अनर्थ करना पत्रकारिता नहीं, बल्कि एजेंडा है।

सुवेंदु अधिकारी के साथ पुरानी यादें

इंटरव्यू के दौरान महुआ ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ अपने पुराने दिनों का जिक्र किया। उन्होंने साझा किया कि 2014 में जब उन्हें टिकट नहीं मिला था, तब सुवेंदु ने उन्हें सांत्वना दी थी और 2016 में उनके लिए चुनाव प्रचार भी किया था। महुआ ने साफ किया कि यह राजनीतिक पाला बदलने का संकेत नहीं, बल्कि पुरानी व्यक्तिगत यादें हैं। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया था, जिसे उन्होंने खारिज किया है।

बागियों पर महुआ का कड़ा प्रहार

पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए महुआ ने उन्हें अवसरवादी करार दिया। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधने वालों से सवाल किया कि जब वे चुनाव जीत रहे थे, तब उन्हें कोई समस्या नहीं थी? महुआ ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए तो अभिषेक का प्रचार और टीएमसी का सिंबल चाहिए था, लेकिन अब हारते ही सब बुरा लगने लगा। यह ममता बनर्जी के भरोसे को धोखा देने जैसा है।

सायनी घोष का जाना बना निजी दुख

महुआ ने कबूला कि पार्टी के भीतर हो रही इस बगावत से उन्हें सबसे अधिक धक्का सायनी घोष के जाने से लगा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सायनी को बहुत कम समय में सब कुछ दिया। महुआ के अनुसार, राजनीति में लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन जिस तरह से सायनी ने भावनात्मक जुड़ाव को दरकिनार किया, वह वाकई हैरान करने वाला और दुखद था।

पार्टी में असहमति की जगह है, गद्दारी की नहीं

महुआ ने जोर देकर कहा कि टीएमसी में हमेशा से असहमति के लिए जगह रही है। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा मुखर होकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ गलत था, तो उसे पार्टी के भीतर रहकर सुलझाया जा सकता था। चुनाव के तुरंत बाद पाला बदलना सिर्फ सत्ता पाने की लालसा को दर्शाता है। महुआ के इस रुख ने साफ कर दिया है कि वे ममता बनर्जी के साथ पूरी मजबूती से खड़ी हैं।

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