कोसी बराज की सुरक्षा पर संकट: स्लैबों के बीच उग रहे पेड़, भविष्य की बड़ी त्रासदी का संकेत
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वीरपुर (सुपौल): बिहार की जीवनरेखा कही जाने वाली कोसी बराज एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह बाढ़ नहीं बल्कि बराज की संरचना में आ रही खामियां हैं। बराज के फाटकों के डाउन स्ट्रीम हिस्से में स्लैबों के बीच पीपल के पौधे उग आए हैं, जो बराज की मजबूती के लिए खतरा बन गए हैं।

जड़ें जमा रहे पेड़, कंक्रीट को पहुंच रहा नुकसान तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, पीपल की जड़ें अत्यंत आक्रामक होती हैं। ये कंक्रीट की मजबूत संरचनाओं में धीरे-धीरे दरारें पैदा कर उन्हें अंदर से खोखला कर देती हैं। वर्तमान में बराज के स्लैबों के बीच उगे ये पौधे अब पेड़ का रूप लेने लगे हैं। यदि इन्हें समय रहते नहीं हटाया गया, तो ये बराज की संरचनात्मक अखंडता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं।

2008 और 2024 का दंश झेल चुका है बराज वर्ष 2008 की कुसहा त्रासदी के बाद, 2024 में भी कोसी ने अपना विकराल रूप दिखाया था। बीते साल 6.61 लाख क्यूसेक के रिकॉर्ड जलप्रवाह के दौरान पानी बराज के ऊपर से बहने लगा था। प्रशासन को सभी 56 फाटकों को खोलकर 48 घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। ऐसी संवेदनशील स्थिति के बीच बराज की दयनीय स्थिति स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रही है।

इतिहास गवाह: 2018 में टला था बड़ा खतरा यह पहली बार नहीं है जब बराज पर पेड़ उगने की समस्या सामने आई है। वर्ष 2018 में भी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता विजय सिंह ने तत्परता दिखाते हुए पेड़ों की कटाई कराई थी। स्थानीय जानकारों का कहना है कि बराज की सुरक्षा से खिलवाड़ अतीत में भारी पड़ चुका है, इसलिए विभाग को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

विभाग का दावा बनाम जमीनी हकीकत जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता बबन पांडे ने सफाई देते हुए कहा है कि बराज की नियमित सफाई और कंक्रीट में उगने वाली झाड़ियों की कटाई निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं, दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों का मानना है कि केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा। कोसी बराज केवल एक पुल नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन की सुरक्षा का आधार है, जिसकी तकनीकी निगरानी और रखरखाव में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।

अधीक्षण अभियंता पर छापेमारी से खलबली इसी बीच, विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में आर्थिक अपराध प्रभाग की छापेमारी ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। पटना, भागलपुर, नोएडा और दिल्ली जैसे ठिकानों पर हुई कार्रवाई में अब तक 3.89 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है, जो विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।

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