मदुरै से सामने आई मानवीय संवेदना की एक भावुक कर देने वाली तस्वीर
मदुरै की रहने वाली 76 वर्षीय मालती ने साबित कर दिया है कि सेवा करने की कोई उम्र नहीं होती। जहां इस उम्र में लोग आराम की तलाश करते हैं, वहीं मालती हर शनिवार तिरुप्परनकुंद्रम की पहाड़ियों पर एक खास जिम्मेदारी निभाने जाती हैं। उनके इंतजार में सैकड़ों बंदर पलकें बिछाए बैठे रहते हैं।
वर्दी से सेवा तक का सफर
मालती का पूरा जीवन अनुशासन और कर्तव्यपरायणता में बीता है। उन्होंने गंधिग्राम विश्वविद्यालय में फिजिकल एजुकेशन डायरेक्टर और कोडैकनाल के एक प्रतिष्ठित स्कूल में काम किया है। इसके अलावा, उन्होंने तमिलनाडु पुलिस विभाग में 33 साल तक अपनी सेवाएं दीं। 2010 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका सेवा भाव कम नहीं हुआ।
पेंशन का बड़ा हिस्सा बेजुबानों के नाम
साल 2015 से मालती ने अपनी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा इन मूक प्राणियों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। हर शनिवार, वे अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को नजरअंदाज कर पहाड़ियों पर पहुंचती हैं। जैसे ही वे आवाज लगाती हैं, 350 से 400 बंदरों का झुंड उनके पास दौड़कर आ जाता है। यह रिश्ता भरोसे और निस्वार्थ प्रेम की अनूठी मिसाल है।
सोशल मीडिया पर छाई ममता की कहानी
मालती का यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग उनकी इस सादगी और दयालुता को सलाम कर रहे हैं। यूजर्स का मानना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में मालती जैसे लोग मानवता की एक उम्मीद की किरण हैं। कमेंट सेक्शन में लोग उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं।
इंसानियत का नया पैमाना
यह कहानी केवल बंदरों को खाना खिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसान और प्रकृति के बीच के उस अटूट संबंध को दर्शाती है जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं। मालती का समर्पण यह बताता है कि असली खुशी दूसरों की मदद करने और बेजुबानों के चेहरे पर मुस्कान (या उनके पेट की भूख मिटाकर) लाने में ही निहित है।
#WATCH | Tamil Nadu: Malathi, a 76-year-old resident of Madurai, has been using a significant portion of her pension to feed monkeys living around Tirupparankundram since 2015. Despite her age and health challenges, she continues to visit several locations every Saturday, where… pic.twitter.com/3PBRtmdOao
— ANI (@ANI) June 23, 2026
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