एमपी में लैंड डील का विवाद: अखिलेश यादव बोले- योगी को हटाने के लिए सीएम बदलने की हो रही साजिश
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिजनों द्वारा उज्जैन में की गई जमीन खरीद ने सियासत गरमा दी है। हालिया पड़ताल में खुलासा हुआ है कि मुख्यमंत्री के परिवार ने उन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी हैं, जहाँ भविष्य में नई सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इस मामले ने विपक्ष को भाजपा पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है।

अखिलेश का तीखा वारः योगी को निशाना बनाने की तैयारी

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को भाजपा की आंतरिक खींचतान बताया है। अखिलेश ने कहा, मोहन यादव को बदनाम करने के लिए भाजपा के भीतर ही साजिश रची जा रही है। अगर मोहन यादव पर आरोप लग रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी 300-600 एकड़ जमीन ली है। भाजपा ये सब जानबूझकर करवा रही है।

अखिलेश ने आगे दावा किया कि यह सब मुख्यमंत्री बदलने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को इसलिए हटाना चाहते हैं, ताकि अंत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को कुर्सी से उतारा जा सके। भाजपा में मुख्यमंत्री बदलने की साजिश चल रही है।

कांग्रेस का हमला: लूट का इंजन है सरकार

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर भाजपा की डबल इंजन सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, एमपी में भाजपा की सरकार लूट का इंजन बनकर चल रही है और खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव इसके मुख्य कर्ताधर्ता हैं।

कांग्रेस ने यह भी इशारा किया कि इस मामले के पीछे भाजपा के अंदरूनी गुटबाजी का हाथ है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र में बैठे कृषि मंत्री के इशारे पर मुख्यमंत्री के खिलाफ यह खबर की खेती की गई है। कांग्रेस के अनुसार, यह पूरी लड़ाई कुर्सी और लूट में हिस्सेदारी को लेकर है।

क्या है ज़मीन खरीद का मामला?

पड़ताल में सामने आया है कि उज्जैन में मोहन यादव के परिजनों (भाई-बहन और चचेरे भाई) ने रणनीतिक रूप से उन जमीनों को खरीदा है, जहाँ से प्रस्तावित सड़क परियोजनाएं गुजरने वाली हैं। यह समयबद्ध खरीद अब विपक्ष के निशाने पर है, जो इसे सरकारी पद के दुरुपयोग और इनसाइडर ट्रेडिंग के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल, इस मामले पर भाजपा का आलाकमान खामोश है, लेकिन विपक्षी दलों के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह विवाद केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में भी देखने को मिलेगा।

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