मधेपुरा जिले की सड़कों पर इन दिनों एक खतरनाक चलन तेजी से पैर पसार रहा है। शहर से लेकर गांव की सड़कों तक नाबालिग किशोर बेखौफ होकर ट्रिपल लोडिंग के साथ बाइक दौड़ाते देखे जा सकते हैं। इनमें से ज्यादातर के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही सिर पर हेलमेट।
स्कूल-कोचिंग के समय सड़कों पर बढ़ता खतरा सड़क सुरक्षा के लिए सबसे चिंताजनक स्थिति सुबह और दोपहर के समय होती है। स्कूल और कोचिंग आने-जाने के दौरान किशोरों की भारी भीड़ सड़कों पर उतरती है। स्कूल यूनिफॉर्म में तीन-तीन लड़कों को बैठाकर तेज रफ्तार में बाइक दौड़ाना और बीच सड़क पर स्टंटबाजी करना आम बात हो गई है। यह लापरवाही न केवल उनके लिए, बल्कि अन्य राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है।
अनुभवहीनता और तेज रफ्तार बनती है काल यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों की अनुभवहीनता और बाइक पर तीन लोगों का भार असंतुलन का बड़ा कारण बनता है। तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के चलते मधेपुरा में पहले भी कई घातक सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई किशोरों ने अपनी जान गंवाई है।
प्रशासन की कार्रवाई नाकाफी क्यों? जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर अभियान चलाकर हेलमेट और लाइसेंस की जांच करती है। हालांकि, समस्या जस की तस बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कई नाबालिग बाइक छोड़कर फरार हो जाते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
अभिभावकों की अनदेखी सबसे बड़ी चुनौती इस समस्या की जड़ में अभिभावकों की भूमिका भी अहम है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता की अनुमति के बिना नाबालिगों के लिए बाइक का उपयोग करना संभव नहीं है। बच्चों की जिद के आगे झुककर उन्हें वाहन सौंपना, उनके भविष्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। स्कूलों को भी छात्रों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है।
कानून क्या कहता है? मोटर वाहन अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को वाहन चलाने की कानूनी अनुमति नहीं है। यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा जाता है, तो इसके लिए वाहन मालिक या अभिभावक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
मधेपुरा की सड़कों पर पनप रही इस गैर-कानूनी प्रवृत्ति पर यदि समय रहते लगाम नहीं कसी गई, तो यह बड़े हादसों का सबब बन सकती है। सुरक्षा केवल प्रशासन का काम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
*“भरत तिवारी अमर रहे…”, नारे और पोस्टर के साथ सीतामढ़ी की सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज.
— Prabhat Khabar (@prabhatkhabar) June 22, 2026
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