शतक जड़ने के बाद भी टीम इंडिया से बाहर: क्या यशस्वी जायसवाल की काबिलियत पर भारी पड़ रही है बीसीसीआई की गलत प्लानिंग ?
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आखिरी तीन पारियों में दो शतक, फिर भी बाहर भारतीय क्रिकेट में यशस्वी जायसवाल का मामला इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस खिलाड़ी ने अपनी आखिरी तीन वनडे पारियों में दो शतक जड़े हों, उसका नाम अगली सीरीज के लिए टीम से गायब होना अपने आप में हैरान करने वाला है। क्या जायसवाल की यह बदनसीबी है या फिर बीसीसीआई और चयनकर्ताओं की विफलता?

विश्व कप जीत का मौन गवाह जायसवाल के साथ यह पहली बार नहीं है। साल 2024 में टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहने के बावजूद उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। जीत के बाद मैदान के कोने में तिरंगा थामे खड़े जायसवाल ने फैंस का दिल जरूर जीता, लेकिन उन्हें वर्कलोड मैनेजमेंट का हवाला देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सवाल यह है कि क्या जायसवाल ने खुद आराम मांगा था?

अभिषेक शर्मा बनाम यशस्वी: क्या तर्क था? पिछली बार जब जायसवाल को टी20 टीम से बाहर किया गया, तो चयनकर्ता अजीत अगरकर ने आक्रामकता और गेंदबाजी विकल्प का तर्क दिया था। अगरकर का कहना था कि उन्हें पावरप्ले में अभिषेक शर्मा जैसे विस्फोटक बल्लेबाज और स्पिन विकल्प की जरूरत है। उस समय भले ही यह तर्क जायसवाल के खिलाफ गया हो, लेकिन वनडे में स्थितियां पूरी तरह अलग हैं।

रोहित शर्मा का पेंच और चयनकर्ताओं की चुप्पी मौजूदा विवाद के पीछे सबसे बड़ी वजह 39 वर्षीय रोहित शर्मा का वनडे टीम में बने रहना है। रोहित अगले साल का विश्व कप खेलने की इच्छा रखते हैं, जबकि बीसीसीआई ने उन्हें कप्तानी से हटाकर पहले ही यह संकेत दे दिया था कि वे भविष्य की योजनाओं में नहीं हैं। अब एक ओपनर के रूप में जायसवाल का सीधा मुकाबला रोहित से है। स्पष्ट है कि यहाँ कौशल की कमी नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं की गलत प्लानिंग का खामियाजा जायसवाल को भुगतना पड़ रहा है।

संजय मांजरेकर बोले: चयनकर्ताओं को मांगनी चाहिए माफी पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने इस चयन पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी नाबाद 116 रन बनाकर आ रहा हो, उसे नजरअंदाज करना समझ से परे है। मांजरेकर के अनुसार, अगर चयनकर्ता किसी सीनियर खिलाड़ी की फिटनेस और फॉर्म पर सवाल होने के बावजूद उन्हें टीम में जगह दे रहे हैं, तो उन्हें कम से कम यशस्वी को फोन कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और उनसे माफी मांगनी चाहिए।

बीसीसीआई को लेने होंगे साहसिक फैसले अगर यशस्वी जायसवाल को बाहर रखने का आधार रोहित शर्मा का अनुभव है, तो बीसीसीआई को पारदर्शी होने की जरूरत है। एक 24 साल के युवा खिलाड़ी के करियर के साथ इस तरह का खिलवाड़ टीम के मनोबल पर बुरा असर डाल सकता है। क्या बीसीसीआई में इतना साहस है कि वे एक खिलाड़ी विशेष से साफ कह सकें कि अब टीम की प्लानिंग का भविष्य आप नहीं हैं? यह मामला अब सिर्फ क्रिकेट का नहीं, बल्कि बोर्ड की नीति और स्पष्टता का बन चुका है।

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