कीर स्टार्मर का इस्तीफा: क्या किंग ऑफ द नॉर्थ एंडी बर्नहैम बनेंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री?
News Image

लंदन: ब्रिटिश राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कीर स्टार्मर ने सोमवार (22 जून) को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भावुक नजर आए स्टार्मर पिछले 10 वर्षों में इस्तीफा देने वाले ब्रिटेन के छठे प्रधानमंत्री बन गए हैं।

मात्र दो साल में बिखरी स्टार्मर सरकार

जुलाई 2024 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई स्टार्मर सरकार दो साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सकी। स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी का खराब प्रदर्शन, पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और कई वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने उनकी सरकार की नींव हिला दी थी। अंततः 22 जून 2026 को उन्हें कुर्सी छोड़ने का मुश्किल फैसला लेना पड़ा।

पीएम की रेस में सबसे आगे किंग ऑफ द नॉर्थ

कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे आगे चल रहा है। बर्नहैम को किंग ऑफ द नॉर्थ के नाम से जाना जाता है। हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव में रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को करारी शिकस्त देकर उन्होंने अपनी मजबूती साबित की है।

कौन हैं एंडी बर्नहैम?

एंडी बर्नहैम लेबर पार्टी के एक अनुभवी और कद्दावर नेता हैं। उन्हें यह उपनाम कोरोना महामारी के दौरान मिला था, जब उन्होंने उत्तरी इंग्लैंड के नागरिकों के अधिकारों और फंड के लिए तत्कालीन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। वे ग्रेट मैनचेस्टर के मेयर रह चुके हैं और ब्रिटिश सरकार में स्वास्थ्य एवं संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

17 जुलाई तक मिल सकता है नया पीएम

ब्रिटेन में अगला आम चुनाव 2029 में प्रस्तावित है। स्टार्मर ने बताया कि लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू करेगी। यह प्रक्रिया संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश (16 जुलाई) से पहले पूरी कर ली जाएगी। यदि बर्नहैम के सामने कोई बड़ा चुनौती पेश नहीं होती है, तो 17 जुलाई तक ब्रिटेन को अपना नया प्रधानमंत्री मिल सकता है।

अस्थिरता का दौर: 10 साल में 6 पीएम

ब्रिटेन में पिछले एक दशक में प्रधानमंत्रियों के लगातार इस्तीफों ने राजनीतिक अस्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टार्मर का कार्यकाल पूरा न कर पाना ब्रिटिश राजनीति में बढ़ते आंतरिक दबाव और चुनौतियों का ही परिणाम माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बर्नहैम बागडोर संभालकर पार्टी और देश को स्थिरता दे पाएंगे।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर का धमाका: उद्धव ठाकरे के 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल, MVA खेमे में खलबली

Story 1

आधी रात को ढाई बजे खुला दरवाजा और उजड़ गया परिवार: गोरखपुर में छोटे भाई ने की भाई-भाभी और मासूम भतीजे की निर्मम हत्या

Story 1

नीट पेपर लीक: जब तक मोहम्मद भाई साथ हैं , जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारियों का भावुक संदेश

Story 1

लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों से दहल उठा शहर, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की नम हुईं आंखें

Story 1

दिल्ली की रात, एक कैब ड्राइवर और इंसानियत की मिसाल: वायरल वीडियो ने जीता सबका दिल

Story 1

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कारसेवकों पर गोलियां चलाने वाले आज चंदे पर सवाल उठा रहे , भूपेंद्र चौधरी का सपा पर तीखा प्रहार

Story 1

सुपौल: मुहर्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट, शांति समिति की बैठक में बनी सौहार्द बनाए रखने की रणनीति

Story 1

चोरी के चक्कर में ओवरस्मार्ट बना चोर, कैमरे ने खोल दी पोल!

Story 1

लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड: 15 छात्रों की दर्दनाक मौत, 11 की जान बचाने के लिए बनाया गया अनोखा रास्ता

Story 1

सातों झीलें सूखीं, महज 8% पानी... तीन तरफ से समंदर से घिरा मुंबई बूंद-बूंद को क्यों तरस रहा है?