इस साल मानसून का मिजाज आम लोगों से लेकर मौसम वैज्ञानिकों तक को हैरान कर रहा है। देश का एक हिस्सा झमाझम बारिश से तरबतर हो रहा है, तो दूसरी तरफ आर्थिक राजधानी मुंबई समेत कई राज्य बारिश की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। मानसून का यह अनिश्चित व्यवहार इस बार खेती और जल प्रबंधन के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है।
46 फीसदी कम बारिश, खतरे की आहट देश में जून के अब तक के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल मानसून की शुरुआत बेहद फीकी रही है। अमूमन इस समय तक 84.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती थी, लेकिन इस बार आंकड़ा गिरकर 46 मिलीमीटर पर सिमट गया है। यह सामान्य से 46 फीसदी कम है। जून के शुरुआती दौर में मानसून की ऐसी सुस्ती भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत है।
रेगिस्तान में भारी बारिश, मुंबई में सूखा हैरानी की बात यह है कि आमतौर पर जून में जहां राजस्थान सूखा रहता था, वहां इस बार सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इसके विपरीत, अरब सागर के तट पर स्थित मुंबई जैसी जगहें अब तक मानसूनी फुहारों से महरूम हैं। इसका असर यह है कि मुंबई की प्यास बुझाने वाली सातों झीलों में जलस्तर न्यूनतम स्तर पर है, जिससे प्रशासन कटौती पर विचार कर रहा है।
क्या अल-नीनो बिगाड़ रहा है खेल? मानसून की इस बेरुखी के पीछे प्रशांत महासागर में सक्रिय अल-नीनो को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी गर्म होता है, तो यह वैश्विक मौसम चक्र को बिगाड़ देता है। 1871 से 2015 के बीच भारत में जब भी सूखे की स्थिति आई है, उनमें अल-नीनो की भूमिका अहम रही है।
सोमाली जेट की कमजोरी और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दो प्रमुख वजहों ने मानसून की दिशा बदल दी है:
किसानों के लिए बड़ा संकट महाराष्ट्र के किसान इस समय सबसे ज्यादा चिंता में हैं। सोयाबीन, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई पर इस देरी का गहरा असर पड़ रहा है। यदि मानसून ने जल्द ही रफ्तार नहीं पकड़ी, तो राज्य में कृषि संकट गहरा सकता है। वहीं, राजस्थान में अचानक हुई भारी बारिश वहां बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सकती है, क्योंकि वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर इतनी बारिश झेलने के लिए तैयार नहीं है।
भारत में बारिश का पुराना पैटर्न पूरी तरह बदल रहा है। अब मानसून निरंतर बारिश के बजाय लंबे सूखे के बाद अचानक भारी वर्षा के फार्मूले पर चल रहा है, जो जल प्रबंधन और कृषि दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
Advance of Southwest Monsoon 2026
— India Meteorological Department (@Indiametdept) June 21, 2026
❖ The Northern Limit of Monsoon continues to pass through 18°N/60°E, 18°N/65°E, 18°N/70°E, Harnai, Solapur, Hyderabad, Bhadrachalam, Koraput, Phulbani, Ranchi, Jamui, Muzaffarpur and 28.3°N/83°E.
❖ Conditions are favourable for further… pic.twitter.com/9g97KZEyrc
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