नीट री-एग्जाम: कहीं बुरका तो कहीं बालियां, परीक्षा केंद्रों पर चेकिंग ने खड़ा किया विवाद
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21 जून 2026 को आयोजित हुई NEET UG की री-एग्जाम चर्चा में है। परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुरक्षा के जो कड़े इंतजाम किए गए, वे कई जगह छात्रों और अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बन गए। ड्रेस कोड और फ्रिस्किंग को लेकर देश भर के कई केंद्रों से विवाद की खबरें सामने आई हैं।

बुरका और धार्मिक प्रतीकों पर घमासान राजस्थान के अजमेर में कुलसुम बानो नाम की छात्रा को बुरका और दुपट्टा हटाने के लिए कहा गया, जिसका उन्होंने कड़ा विरोध किया। वहीं, गुजरात के अहमदाबाद में परीक्षा केंद्र पर छात्रों को गले में पहनी गई कंठी (धार्मिक धागा) हटाने के लिए मजबूर किया गया। इन घटनाओं के बाद केंद्र पर भारी हंगामा देखने को मिला।

बालियां गायब होने से छात्राओं की परेशानी गोरखपुर यूनिवर्सिटी केंद्र पर एक अजीब वाकया सामने आया। छात्रा प्रज्ञा त्रिपाठी को परीक्षा से पहले अपनी बालियां उतारने के लिए कहा गया। परीक्षा के बाद जब वह बालियां लेने पहुंचीं, तो उन्हें वह महिला कर्मचारी ही नहीं मिली जिसने बालियां जमा की थीं। काफी मशक्कत और पुलिस की मदद के बाद छात्रा को उनकी संपत्ति वापस मिल सकी।

पैसे गायब होने की शिकायतें कई केंद्रों पर जांच के नाम पर छात्रों से उनके पर्स और पैसे भी जमा कराए गए। परीक्षा संपन्न होने के बाद कई छात्रों ने शिकायत की कि उनके 200 से 500 रुपये तक गायब हैं। इस धांधली को लेकर अभिभावकों ने पुलिस से खुलकर शिकायत की।

चोटी से लेकर जूतों तक की सघन तलाशी सुरक्षा इतनी सख्त थी कि छात्रों के रुमाल, चश्मे, पैंट की जिप और चप्पलों तक की जांच की गई। कई छात्राओं की चोटियां खुलवाई गईं, तो कुछ छात्रों को मुंह खुलवाकर चेक किया गया। इन दृश्यों ने छात्रों और उनके परिजनों को हैरान और परेशान कर दिया।

देर से पहुंचने पर गेट हुए बंद महाराष्ट्र और भोपाल में दो-दो मिनट की देरी की वजह से चार छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। अभिभावकों ने काफी मिन्नतें कीं और हंगामा भी किया, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए गेट नहीं खोले।

क्या हैं NTA के आधिकारिक नियम? NTA के स्पष्ट नियम हैं कि NEET परीक्षा में बुरका, हिजाब या पगड़ी पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, ऐसे छात्रों को सुरक्षा जांच के लिए एक घंटे पहले सेंटर पहुंचना होता है। साथ ही, महिला उम्मीदवारों की जांच केवल महिला स्टाफ द्वारा ही की जानी चाहिए, ताकि उनकी गोपनीयता और सम्मान बना रहे। इन नियमों के बावजूद जमीनी स्तर पर हुई सख्ती ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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