यूक्रेन-पोलैंड के बीच कूटनीतिक दरार: जेलेंस्की ने लौटाया पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान
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रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक रहा पोलैंड अब कूटनीतिक विवाद में उलझ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और पोलैंड के बीच पुराने ऐतिहासिक घावों ने एक बार फिर रिश्तों में खटास पैदा कर दी है। स्थिति तब और बिगड़ गई जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को दिए गए सम्मान वापस लेने की घोषणा की।

क्या है विवाद की जड़?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब जेलेंस्की ने यूक्रेन की एक सैन्य यूनिट का नाम यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखने का फैसला किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस संगठन की भूमिका को लेकर पोलैंड में बेहद नाराजगी है। पोलैंड का आरोप है कि UPA ने उस समय हजारों पोलिश नागरिकों का नरसंहार किया था।

जेलेंस्की का बड़ा कदम

जेलेंस्की ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने पोलैंड का प्रतिष्ठित ऑर्डर ऑफ the व्हाइट ईगल सम्मान वापस कर दिया है। यह सम्मान उन्हें 2023 में मिला था। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यह सम्मान यूक्रेनी लोगों और उनकी सेना का प्रतीक था, लेकिन वर्तमान स्थितियों को देखते हुए इसे लौटाना ही सही है। उनके साथ-साथ वहां के अन्य उच्च अधिकारियों ने भी अपने सम्मान वापस कर दिए हैं।

पोलैंड का कड़ा रुख

पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नवरोकी ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जेलेंस्की से यह सम्मान वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। नवरोकी के अनुसार, UPA का महिमामंडन करना पोलिश जनता के लिए अस्वीकार्य है, क्योंकि यह संगठन पोलैंड के नागरिकों के खिलाफ क्रूर अपराधों के लिए जिम्मेदार रहा है।

क्या इससे युद्ध में यूक्रेन को मिलेगा झटका?

हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर है, लेकिन पोलैंड ने स्पष्ट किया है कि इससे रूस के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में उनके समर्थन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पोलिश प्रशासन के अनुसार, यह सम्मान वापस लेना एक ऐतिहासिक वैचारिक मुद्दा है, न कि युद्ध में सैन्य मदद को रोकने का संकेत।

मॉस्को के लिए तोहफा

यूक्रेनी अधिकारियों ने पोलैंड के इस कदम की तीखी आलोचना की है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने इसे एक रणनीतिक गलती करार दिया है। वहीं, किरिलो बुदानोव जैसे शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि यह आपसी कलह रूस के लिए एक तोहफे की तरह है, जिसका उपयोग मास्को दोनों देशों के बीच नफरत फैलाने और लाभ उठाने के लिए कर सकता है।

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