NEET री-एग्जाम: नागपुर के छात्र का सेंटर अबू धाबी का विवाद, NTA ने डिजिटल सबूतों से किया खुलासा
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NEET UG 2026 की दोबारा होने वाली परीक्षा के ठीक पहले एक अजीबोगरीब मामला गरमाया। नागपुर के एक छात्र को परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी आवंटित किया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जमकर आलोचना हुई। लेकिन जांच के बाद जो सच सामने आया, उसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी।

क्या था पूरा विवाद? मामला नागपुर के छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब से जुड़ा है। छात्र के पिता का दावा था कि उन्होंने अपनी पसंद के शहरों में नागपुर, वर्धा और भंडारा को चुना था। उनके अनुसार, उनके बेटे के पास पासपोर्ट तक नहीं है, ऐसे में विदेश जाकर परीक्षा देना असंभव था। इस खबर के वायरल होने के बाद विपक्षी दलों, खासकर राहुल गांधी ने भी NTA पर निशाना साधा।

NTA ने डिजिटल कुंडली खोल दी चारों तरफ से घिरने के बाद NTA ने मामले की गहन जांच की। एजेंसी के वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड्स ने चौंकाने वाला खुलासा किया। डिजिटल फुटप्रिंट्स से यह साफ हो गया कि केंद्र में बदलाव किसी तकनीकी खामी के कारण नहीं, बल्कि छात्र की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके खुद किया गया था।

सबूतों में क्या मिला? जांच में सामने आया कि जिस IP एड्रेस का उपयोग करके छात्र ने मई में अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया था, उसी IP एड्रेस से सेंटर को बदलकर अबू धाबी और दूसरी पसंद दुबई किया गया था। NTA के अनुसार, सेंटर को न केवल बदला गया, बल्कि दो बार उसका प्रीव्यू भी देखा गया था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बदलाव सफलतापूर्वक हो गया है।

गलती के बावजूद छात्र की मदद डिजिटल सबूतों से छात्र की गलती साबित होने के बाद भी NTA ने स्टूडेंट-फर्स्ट नीति अपनाई। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक भ्रम के कारण किसी भी छात्र का भविष्य खराब नहीं होना चाहिए। परीक्षा से महज 48 घंटे पहले जब परिवार ने अनुरोध किया, तो NTA की टीम ने तुरंत पहल की।

वापस नागपुर किया गया सेंटर एजेंसी ने फौरन कार्रवाई करते हुए औपचारिकताएं पूरी कीं और छात्र का केंद्र अबू धाबी से बदलकर वापस नागपुर कर दिया। NTA ने जानकारी दी कि री-शेड्यूल के बाद करीब 3.2 लाख उम्मीदवारों ने करेक्शन विंडो का लाभ उठाया था, जिसमें से 99.5% से अधिक छात्रों को उनकी पहली पसंद का ही परीक्षा शहर दिया गया है।

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