महाराष्ट्र में गूंजा बंगाल का संगीत: एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत मनाया गया राज्य स्थापना दिवस
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मुंबई स्थित महाराष्ट्र लोक भवन में पश्चिम बंगाल का राज्य स्थापना दिवस पूरे उत्साह और सांस्कृतिक भव्यता के साथ मनाया गया। यह आयोजन भारत सरकार की एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के बीच आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है।

सांस्कृतिक एकता का संगम इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने देशभर में रह रहे पश्चिम बंगाल के नागरिकों को बधाई दी। कार्यक्रम की शुरुआत पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि के वीडियो संदेश के साथ हुई। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान ही राष्ट्रीय एकता की असली नींव है, जो राज्यों के बीच की दूरियों को मिटाती है।

महाराष्ट्र और बंगाल: वैचारिक समानता राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भौगोलिक रूप से दो हजार किलोमीटर दूर होने के बावजूद, महाराष्ट्र और बंगाल की आत्मा एक है। उन्होंने बताया कि दोनों राज्यों के लोगों की राष्ट्रवादी सोच और आध्यात्मिक चेतना में गहरा साम्य है।

राज्यपाल ने कहा, जिस तरह महाराष्ट्र ने संत तुकाराम और अहिल्यादेवी होल्कर जैसे व्यक्तित्व दिए, वैसे ही बंगाल ने चैतन्य महाप्रभु और स्वामी विवेकानंद जैसे युगपुरुष दिए। उन्होंने विशेष रूप से सोलापुर विश्वविद्यालय के मराठी भाषी छात्रों की प्रशंसा की, जिन्होंने बंगाली गीतों और नृत्यों को शानदार तरीके से प्रस्तुत कर सांस्कृतिक एकता की मिसाल पेश की।

स्वतंत्रता संग्राम और साझा विरासत राज्यपाल ने इतिहास को याद करते हुए कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में महाराष्ट्र और बंगाल का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बिपिन चंद्र पाल, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे महान क्रांतिकारियों को नमन किया।

उन्होंने प्रसिद्ध उक्ति जो बंगाल आज सोचता है, भारत कल सोचता है का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र को वंदे मातरम और जन गण मन जैसे अमूल्य उपहार बंगाल की ही देन हैं।

मुंबई और कोलकाता का अद्भुत मेल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई को देश की वित्तीय राजधानी और कोलकाता को सांस्कृतिक राजधानी बताते हुए दोनों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बंगाली भाषा की मिठास की सराहना करते हुए कहा कि यह भाषा रसगुल्ले की तरह ही मधुर है।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने दुर्गा पूजा गीत, लोक नृत्य और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर सोलापुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश महानवार के साथ-साथ कई अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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