अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 111 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद आखिरकार एक समझौता हो गया है। इस समझौते ने वैश्विक रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा अली खामेनेई ने राष्ट्र के नाम एक संदेश जारी किया है, जो देश के प्रति उनके अटूट समर्पण और ईरान के राष्ट्रवाद को रेखांकित करता है।
मुज्तबा खामेनेई के संदेश का सार यह है कि उनके लिए देश और देश के लोग सर्वोपरि हैं। उन्होंने लिखा, इस क्षण से हम यानी आप, गौरवशाली राष्ट्र और यह विनम्र सेवक, शर्तों के पूरा होने की प्रतीक्षा करेंगे। यह स्पष्ट करता है कि ईरान में शासन का आधार केवल सत्ता नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद है। हाल ही में बाबा रामदेव ने भी अपने पॉडकास्ट में ईरानियों के देश के प्रति जुनून और अटूट प्रेम की प्रशंसा की थी।
जब युद्ध के दौरान पूरी दुनिया में तेल और गैस का संकट आया, तो कई देशों में लोग सड़कों पर उतर आए और आपसी कलह बढ़ गई। इसके विपरीत, ईरान ने संकट को अवसर और एकजुटता का माध्यम बनाया। अमेरिकी रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि हमलों और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरानी जनता विद्रोह कर देगी, लेकिन ईरानी नागरिकों ने घरेलू राजनीति के बजाय देश की सुरक्षा को चुना और नेतृत्व के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे।
ईरान ने युद्ध के मैदान में भी अपनी साफ्ट डिप्लोमेसी का परिचय दिया। एक दुखद घटना में स्कूल पर हुए हमले में मारी गई मासूम बच्चियों के स्कूल बैग को ईरानी अधिकारी कूटनीतिक सिंबल के तौर पर साथ ले गए। युद्ध की विभीषिका के बीच भी स्कूलों में पढ़ाई नहीं रुकी। ईरानी सैनिकों के मिसाइल दागते हुए कॉफी पीने और सोशल मीडिया पर रील बनाने के वीडियो ने दुनिया को यह दिखाया कि उनका मनोबल कितना ऊंचा था।
इस संघर्ष के दौरान ईरान के शीर्ष नेताओं का आचरण प्रेरणादायक रहा। विदेश मंत्री पेजिशकियान युद्ध के कठिन दिनों में आम होटलों में खाना खाते और डॉक्टर के रूप में अस्पताल में सर्जरी करते देखे गए। जब देश के बड़े प्रतिनिधि जमीन पर आम लोगों के बीच सक्रिय हों, तो जनता का भरोसा बढ़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि लाखों लोग निहत्थे ही एकजुटता दिखाने के लिए सड़कों पर उतर आए।
इस समझौते ने न केवल शांति की उम्मीद जगाई है, बल्कि इजरायल के लिए रणनीतिक संकट भी पैदा कर दिया है। इजरायल में नेतन्याहू सरकार के खिलाफ भारी विरोध शुरू हो गया है, क्योंकि वहां के सैन्य विशेषज्ञ इसे रणनीतिक हार मान रहे हैं। खामेनेई ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि यह समझौता दुश्मन के रुख को स्वीकार करना नहीं है, बल्कि देश के अधिकारों की रक्षा के लिए लिया गया एक संतुलित फैसला है।
मुज्तबा खामेनेई ने यह स्वीकार करने में भी संकोच नहीं किया कि इस समझौते को लेकर उनकी निजी राय अलग थी, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति और सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के प्रति अपना भरोसा जताया। यह पारदर्शिता और साहस ही है जो एक नेता को जनता के करीब लाता है। 111 दिनों का यह संघर्ष इस बात का बड़ा उदाहरण है कि जब कोई राष्ट्र एकजुट होता है, तो वह सबसे बड़ी ताकतों के सामने भी झुकने से इनकार कर सकता है।
The respect that nations hold for Iran today is due to its true independence. This independence is rooted in a culture that learned from Imam Hussain to never surrender, and from Imam Mahdi to always remain hopeful. pic.twitter.com/9nUviG7mMS
— 🟩 ☫ 🟥رح (@dokhtare_zahra) June 19, 2026
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