महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। शिवसेना (UBT) के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर उद्धव ठाकरे ने एक ऐसा भावुक और चौंकाने वाला दांव चला है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। लगातार आंतरिक बगावत की खबरों के बीच उद्धव का यह कदम कई बड़े सवालों को जन्म दे रहा है।
अंदरूनी साजिश: क्या फिर होने वाली है शिंदे पार्ट-2 की एंट्री?
पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। चर्चा है कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद बागी तेवर अपना चुके हैं। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, ये सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल होने की कवायद में जुटे हैं। साल 2022 में पार्टी के बंटवारे का जख्म अभी भरा भी नहीं था कि एक और बड़ी बगावत ने मातोश्री की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भावुक दांव या आखिरी चेतावनी? चोरों को कमान नहीं सौंपूंगा
स्थापना दिवस की सभा में उद्धव ठाकरे बेहद भावुक दिखे, लेकिन उनके तेवर आक्रामक थे। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, अगर पार्टी को मुझ पर भरोसा नहीं है, तो मैं अभी इस्तीफा देने को तैयार हूं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वे पार्टी की कमान किसी निष्ठावान शिवसैनिक को तो सौंप सकते हैं, लेकिन उसे कभी भी चोरों के हाथों में नहीं जाने देंगे।
कांग्रेस में विलय की अटकलें और ठाकरे का पलटवार
बागी सांसदों द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) का भविष्य में कांग्रेस में विलय हो सकता है। इस पर उद्धव ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो पार्टी 30 साल तक बीजेपी के साथ रहकर भी उसमें विलीन नहीं हुई, वह कांग्रेस में कैसे मिल सकती है? इसके विपरीत, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असल में महाराष्ट्र बीजेपी ही कहीं एकनाथ शिंदे गुट में अपना विलय न कर ले।
लोकतंत्र पर मंडराता संकट?
अपने खिलाफ लग रहे वर्क फ्रॉम होम और कार्यकर्ताओं से दूरी के आरोपों का जवाब देते हुए उद्धव ने कहा कि वे लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं। आर्टिकल के अंत में, उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। ठाकरे ने चेतावनी दी कि देश एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं वाली खतरनाक राह पर बढ़ रहा है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उद्धव ठाकरे का यह इस्तीफा कार्ड बागी सांसदों को शांत करने में कारगर साबित होगा या महाराष्ट्र में किसी नए सियासी तूफान का संकेत है।
#BREAKING
— Nabila Jamal (@nabilajamal_) June 19, 2026
Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray offered to step down as party president amid a possible fresh wave of rebellion within the party
However, he struck a defiant note asserting that his workers remained confident and that he was ready to face any challenge as long… pic.twitter.com/VafFaI0fQz
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