ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते पर अब ईरान के सुप्रीम लीडर इमाम सैयद मोजतबा खामेनेई ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान द्वारा हस्ताक्षरित इस MoU पर प्रतिक्रिया देते हुए खामेनेई ने दोहरे रुख अपनाए हैं।
जिम्मेदारी के साथ दी मंजूरी अपने संबोधन में मोजतबा खामेनेई ने स्वीकार किया कि इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईरानी अधिकारियों ने गंभीरता और ईमानदारी से काम किया है। उन्होंने बताया कि उनकी व्यक्तिगत राय अलग थी, लेकिन राष्ट्रपति (जो सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख भी हैं) द्वारा प्रतिरोध मोर्चे के अधिकारों की रक्षा के भरोसे के बाद उन्होंने इस डील को अपनी मंजूरी दी।
ट्रंप को खुली चेतावनी समझौते के बावजूद मोजतबा ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने कोई अनुचित या जरूरत से ज्यादा मांग रखी, तो ईरान किसी भी कीमत पर उसके सामने नहीं झुकेगा। उन्होंने साफ किया कि भविष्य में होने वाली आमने-सामने की बातचीत का मतलब दुश्मन की शर्तों को स्वीकार करना नहीं होगा।
शर्तों की पूर्ति का इंतजार सुप्रीम लीडर ने जोर देकर कहा कि अब पूरी ईरानी जनता और वे स्वयं इस समझौते की शर्तों के पूरा होने का इंतजार करेंगे। उन्होंने आशा जताई कि अल्लाह की कृपा से ईरान को हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
अमेरिका की नीयत पर भरोसा मुश्किल दूसरी ओर, मुंबई में ईरान के कॉन्सल जनरल सईद रजा मोसायेब मोतलाघ ने अमेरिका को लेकर अविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि हाल के ऐतिहासिक अनुभवों और दो युद्धों को देखते हुए अमेरिका की नेक नीयत पर भरोसा करना कठिन है। हालांकि, ईरान ने अच्छी नीयत के साथ बातचीत शुरू की है और उम्मीद है कि इसे एक व्यापक समझौते का रूप दिया जाएगा।
इजरायल पर बरसे ईरानी अधिकारी मोसायेब मोतलाघ ने इजरायल (जायोनी शासन) को शांति का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल हिंसा और युद्ध के जरिए दुनिया में संकट पैदा करना चाहता है और अमेरिका-ईरान के बीच की बातचीत को पटरी से उतारने की हर संभव कोशिश कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के लिए इजरायल का यह रवैया नया नहीं है।
The full text of the message of Imam Sayyid Mojtaba Khamenei, the Leader of the Islamic Revolution, addressing the Iranian nation regarding the Memorandum of Understanding between the presidents of Iran and America, June 18, 2026 pic.twitter.com/9nSD2NfkVe
— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) June 18, 2026
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