नई दिल्ली: देश में आजकल E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के इस्तेमाल को लेकर खूब चर्चा है। स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ते भारत के कदम के बीच सोशल मीडिया पर एक अजीबोगरीब दावा वायरल हो गया। दावा किया गया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों की टंकी के पास चींटियों का जमावड़ा हो रहा है।
क्या वाकई एथेनॉल चींटियों को दावत दे रहा है? इस पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
हाल ही में इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक कार के फ्यूल कैप के पास बड़ी संख्या में चींटियां रेंगती हुई दिखीं। वीडियो में कार पर E20 का स्टिकर लगा था, जिसे आधार बनाकर यह दावा किया गया कि एथेनॉल में मौजूद मिठास चींटियों को आकर्षित कर रही है। बिना किसी वैज्ञानिक जांच के यह वीडियो तेजी से फैलने लगा, जिससे वाहन मालिकों के बीच चिंता बढ़ गई।
BPCL ने इन दावों की बारीकी से जांच की और स्पष्ट किया कि पेट्रोल में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल और खाने वाली चीनी में जमीन-आसमान का अंतर है।
कंपनी ने बताया कि फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल को किण्वन (Fermentation) और आसवन (Distillation) की जटिल प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इस दौरान इसमें मौजूद तमाम शुगर यानी शर्करा को पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है। इसके अलावा, इसमें ऐसे डिनैचुरेंट्स मिलाए जाते हैं जो कीट-पतंगों को दूर रखने का काम करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एथेनॉल मिलने के बाद भी ईंधन में पेट्रोल की तीव्र हाइड्रोकार्बन गंध ही हावी रहती है। एथेनॉल की हल्की गंध सामान्य पेट्रोल की गंध के सामने नगण्य होती है, जो किसी भी कीट को पास नहीं आने देती।
इसके अलावा, BPCL का कहना है कि E20 पेट्रोल में सामान्य पेट्रोल की तुलना में वाष्पीकरण कम होता है। इससे वातावरण में ऐसे तत्वों की मौजूदगी काफी कम हो जाती है, जो किसी कीट को अपनी ओर खींच सकें। कंपनी ने साफ किया कि इस वायरल दावे का कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है।
E20 पेट्रोल असल में 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण है। एथेनॉल गन्ने और मक्का जैसी फसलों से तैयार किया जाने वाला एक जैव-ईंधन (Bio-fuel) है।
भारत सरकार इसे तेजी से इसलिए प्रमोट कर रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके और प्रदूषण का स्तर भी नीचे आए। ऐसे में इस तरह की भ्रामक खबरों से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है।
BPCL has examined the claims circulating on social media regarding ants congregating around vehicle fuel filler caps and their alleged association with E20 petrol.
— Bharat Petroleum (@BPCLimited) June 17, 2026
Fuel-grade ethanol used for petrol blending is produced through fermentation and distillation processes that… pic.twitter.com/1qED7xBBhe
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