वर्साय पैलेस: जहाँ ट्रंप ने ईरान से की शांति डील , वहीं से शुरू हुई थी हिटलर की खूनी तानाशाही
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अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भी मौजूद थे। लेकिन यह स्थान केवल अपनी भव्यता के लिए नहीं, बल्कि इतिहास के एक काले पन्ने के लिए भी जाना जाता है।

107 साल पुराना वह जून का महीना इसी वर्साय पैलेस में 107 साल पहले, जून 1919 में प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने वाली संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इतिहासकार इसे शांति समझौता कम और जर्मनी पर जबरन थोपा गया आदेश अधिक मानते हैं। यही वह संधि थी, जिसने जर्मनी के भीतर बदले की भावना को जन्म दिया और आगे चलकर एडॉल्फ हिटलर के उदय और द्वितीय विश्व युद्ध की नींव रखी।

क्या हुई थी वर्साय की संधि? 1914 से 1918 के बीच चले प्रथम विश्व युद्ध के बाद, विजेता देशों (अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली) ने जर्मनी को युद्ध का मुख्य दोषी ठहराया। 28 जून 1919 को हुई इस संधि में जर्मनी पर कठोर आर्थिक जुर्माना लगाया गया, उसके कई इलाके छीन लिए गए और उसकी सैन्य शक्ति को पूरी तरह पंगु बना दिया गया। इस अपमान ने जर्मनी की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया, जिसका फायदा उठाकर हिटलर सत्ता में आया।

ट्रंप का 14 पॉइंट्स वाला संयोग हैरानी की बात यह है कि आज ट्रंप और ईरान के बीच जिस MoU पर सहमति बनी है, उसमें भी 14 पॉइंट्स हैं। 1919 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने भी 14 पॉइंट्स का शांति प्लान पेश किया था। तब विल्सन का मकसद युद्धों को खत्म करना था, लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस ने बदले की भावना में उन पॉइंट्स को नजरअंदाज कर जर्मनी को बेइज्जत किया। आज दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ट्रंप का यह 14 पॉइंट्स वाला समझौता वाकई टिकाऊ साबित होगा या इतिहास खुद को दोहराएगा।

हिटलर और वर्साय: इतिहास का खौफनाक मोड़ 1940 में पेरिस पर कब्जा करने के बाद हिटलर की नाजी सेना ने वर्साय पैलेस को अपने नियंत्रण में ले लिया। जून 1940 की सुबह वहां नाजी झंडा फहराया गया। यह जगह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बमबारी और तबाही का केंद्र बनी रही। 1944 में जब मित्र देशों की सेना ने वर्साय को आजाद कराया, तो वे उसी हॉल ऑफ मिरर्स में पहुंचे जहां 25 साल पहले वर्साय की संधि हुई थी।

आज उसी ऐतिहासिक परिसर में खड़े होकर ट्रंप का ईरान के साथ शांति का हाथ मिलाना वैश्विक राजनीति की एक नई दिशा की ओर इशारा करता है। दुनिया अब यह देख रही है कि क्या यह समझौता वाकई में शांति लाएगा, या यह केवल एक और राजनीतिक दांव साबित होगा।

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