पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक अपराधी को कानून के शिकंजे से छुड़ाने के लिए जो कुछ हुआ, उसने सूबे की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक और खुद को पुष्पा कहने वाले जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी सरीना ने समर्थकों की एक बड़ी भीड़ जुटाकर न केवल पुलिस को चुनौती दी, बल्कि राज्य में अपने राजनीतिक दबदबे का शक्ति प्रदर्शन भी किया।
जहांगीर खान के खिलाफ जबरन वसूली, जमीन कब्जाने, दंगा भड़काने और चुनाव बाद हिंसा जैसे 7 गंभीर मामले दर्ज हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यह प्रदर्शन महज एक गिरफ्तारी का विरोध था? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रदर्शन की टाइमिंग बेहद अहम है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यह भीड़ यह साबित करने की कोशिश कर रही थी कि सरकार बदलने के बावजूद फाल्टा में उनका वर्चस्व कायम है।
अराजकता का यह खेल तब बिगड़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर कब्जा कर लिया और ट्रैफिक ठप कर दिया। पहले की सरकारों में शायद ऐसी भीड़ पुलिस थानों को घेर लेने में सफल हो जाती, लेकिन इस बार केंद्रीय सुरक्षाबलों ने कड़ा रुख अपनाया। सड़कों पर उतरने वाले उपद्रवी सुरक्षाबलों की सख्ती देख ऐसे भागे कि जान बचाने के लिए कई लोग पानी में कूद गए।
यह हिंसक मानसिकता सिर्फ फाल्टा या पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी कट्टरपंथी सोच है जो कानून को अपने हाथ में लेने का दुस्साहस करती है। अतीत में मुर्शिदाबाद सहित कई राज्यों में ऐसे प्रदर्शनों को देखा गया है, जिनका घोषित मकसद कुछ और होता है, लेकिन असल लक्ष्य आम नागरिकों में भय पैदा करना और अपना दबदबा कायम करना होता है।
राज्य सरकार ने अब इस मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ तौर पर आदेश दिया है कि प्रदर्शन के नाम पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले हर उपद्रवी की पहचान कर उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस रिकॉर्ड में दुर्दांत अपराधी के तौर पर दर्ज जहांगीर खान के समर्थकों को अब यह समझना होगा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून को चुनौती देना और हिंसा फैलाना जघन्य अपराध है।
यह घटना स्पष्ट करती है कि कानून के डर को खत्म करने की कोशिश करने वाली भीड़ पर लगाम लगाना प्रशासन के लिए कितनी बड़ी चुनौती है, और अब समय आ गया है कि इस उन्मादी मानसिकता को कानून की भाषा में ही जवाब दिया जाए।
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— Zee News (@ZeeNews) June 17, 2026
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