अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगी कफ सिरप, सरकार के नए नियमों से बदलेगी दवा खरीदने की आदत
News Image

अब तक जिस कफ सिरप को आप आसानी से मेडिकल स्टोर से खरीद लेते थे, अब उसे खरीदना उतना आसान नहीं होगा। केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में बड़ा बदलाव करते हुए कफ सिरप और सिरप-बेस्ड दवाओं को ओवर-द-काउंटर (बिना पर्ची) बिक्री से बाहर कर दिया है। अब इन्हें खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य कर दी गई है।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? पिछले कुछ वर्षों में भारत सहित दुनिया भर में मिलावटी कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतों के कई दुखद मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर निगरानी बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। इसका उद्देश्य सिर्फ खांसी की दवा ही नहीं, बल्कि सभी प्रकार की सिरप आधारित दवाओं को सख्त रेगुलेटरी दायरे में लाना है।

नियम में क्या बदला है? स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स 1945 के शेड्यूल K के सीरियल नंबर 13 में संशोधन किया है। पहले इस प्रावधान के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कुछ दवाओं की बिक्री के लिए छूट थी। अब सरकार ने इस एंट्री से सिरप शब्द को ही हटा दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब कफ सिरप या किसी भी प्रकार की सिरप बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेची जा सकेगी।

बाजार पर क्या पड़ेगा असर? भारत में कफ सिरप का बाजार बहुत बड़ा है। अनुमान है कि 2035 तक यह बाजार 65 करोड़ डॉलर (करीब 5,400 करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंच सकता है। इस फैसले से रिटेल दुकानों और फार्मा कंपनियों के कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा। अब दवा दुकानदारों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत लाइसेंसिंग और रेगुलेटरी नियमों का पहले से कहीं ज्यादा सख्ती से पालन करना होगा।

विशेषज्ञों की क्या है राय? मेडिकल एक्सपर्ट्स ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष डॉ. अनिल नायक के अनुसार, कई सिरप में कैफीन की मात्रा होती है, जिसका गलत इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता रहा है।

सीनियर पीडियाट्रिक कंसल्टेंट डॉ. जितेंद्र जैन का कहना है कि खांसी अक्सर किसी गंभीर बीमारी जैसे निमोनिया या अस्थमा का लक्षण हो सकती है। बिना डॉक्टरी सलाह के सिरप देने से बच्चों के सही इलाज में देरी हो सकती है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने चिंता भी जताई है कि ग्रामीण इलाकों में इन कड़े नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

सीधे सिर पर बम गिराऊंगा : G7 समिट में ईरान को डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक चेतावनी

Story 1

राजस्थान का सियासी पारा: अशोक गहलोत के जादुई बयानों ने बढ़ाई बीजेपी की बेचैनी

Story 1

रोहित शर्मा का धमाकेदार जवाब: फिटनेस पर लगी मोहर, मैदान पर बिखेरा जलवा

Story 1

वेस्टइंडीज का बड़ा दांव: श्रीलंका टेस्ट सीरीज के लिए दो घातक गेंदबाजों की वापसी, विकेटकीपिंग में भी बड़ा बदलाव

Story 1

नीट का बढ़ता दबाव: दिल्ली में छात्रा ने दी जान, इस साल 14 छात्र कर चुके हैं सुसाइड

Story 1

हम इंस्टाग्राम के सबसे फेमस कपल हैं : G7 समिट में मेलोनी के मजाक ने इंटरनेट पर मचाई धूम

Story 1

एलन मस्क का बड़ा धमाका: Grok Imagine Video 1.5 से अब 25 सेकंड में तैयार होंगे दमदार AI वीडियो

Story 1

IND vs AFG: लखनऊ में टीम इंडिया का विराट प्रदर्शन, अफगानिस्तान को 170 रनों से रौंदा

Story 1

200MP कैमरे और 6900mAh बैटरी के साथ आ रहा Vivo का नया फोल्डेबल फोन, जानें क्या है खास

Story 1

मोदी सरकार सपनों को कुचलने वाली मशीन : राहुल गांधी का कोटा में चुनावी हुंकार