इतिहास के पन्नों को पलटने की कवायद राजस्थान के उदयपुर में हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने इतिहास को लेकर एक बड़ा दावा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की ही विजय हुई थी, जिसे बाद में गलत नैरेटिव के जरिए दबाने की कोशिश की गई।
मुगल इतिहासकारों के दावों का जिक्र आरएसएस प्रमुख ने युद्ध के घटनाक्रम का हवाला देते हुए बताया कि मुगल इतिहासकारों के अपने दस्तावेजों में भी हार के संकेत मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पहले हमले में ही मुगल सेना को छह-सात मील पीछे भागना पड़ा था। स्थिति इतनी भयावह थी कि मुगल सेना गोगुंदा किले में छिप गई और रसद खत्म होने पर उन्हें अपने ही घोड़ों का मांस तक खाना पड़ा था।
हिंदुवा सूरज की स्थापना मोहन भागवत ने बताया कि युद्ध के तीसरे चरण में महाराणा प्रताप ने अपनी युद्धनीति से मेवाड़ को मुगलों से मुक्त कराया। चावंड को राजधानी बनाकर उन्होंने हिंदुवा सूरज के रूप में धर्म और न्याय पर आधारित साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज हम संस्कृति की जो चर्चा कर रहे हैं, वह इस बात का प्रमाण है कि प्रताप की विचारधारा और विजय आज भी जीवित है।
भारत कभी गुलाम नहीं रहा भागवत ने चाणक्य के मंत्र न आर्यस दास भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुलामी के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, हमारा इतिहास गुलाम होने का नहीं, बल्कि आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष का है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अकबर बादशाह बनने के बाद भी चैन की नींद नहीं सो सका, क्योंकि महाराणा प्रताप ने उसे हमेशा यह संदेश दिया कि भारत जिंदा है और संघर्ष करने में सक्षम है।
अकबर का कोई नामलेवा नहीं अपने संबोधन के अंत में भागवत ने ऐतिहासिक विडंबना पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज महाराणा प्रताप की जयंती पूरे गौरव के साथ मनाई जाती है, लेकिन अकबर का नाम लेने वाला भी कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि इतिहास के पुनर्लेखन और सही तथ्यों को सामने लाने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि भारत ने कभी अपनी अस्मिता से समझौता नहीं किया।
*#WATCH | Udaipur, Rajasthan: RSS Chief Mohan Bhagwat attends the Haldighati Vijay 450th anniversary commemoration event.
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) June 17, 2026
He says, “…Today is Maharana Pratap s birth anniversary. Yesterday marked four hundred and fifty years since the battle. Why was the Battle of Haldighati a… pic.twitter.com/JBiy2B7X0B
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